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चाचा ने फाड़ी मेरी कुंवारी चूत! Antarvasna Family Sex

📅 October 29, 2026 👤 Vasnastory 🔥 NEW

Family Sex Story  : चाचा ने देख ली मेरी फिंगरिंग, फिर फाड़ दी कुंवारी चूत! लंड चूसकर रात भर चुदवाई! 15 दिनों तक चाची के घर में गांड-चूत की चुदाई। Antarvasna

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम प्रिया है। मैं 24 साल की हूं और एक अच्छी सी एमएनसी कंपनी में जॉब कर रही हूं। आज मैं अपनी पहली चुदाई की वो गर्म और निजी कहानी शेयर करने आई हूं, जो आज भी मेरी चूत को गीला कर देती है।

उम्मीद है आप सबको ये कहानी पसंद आएगी और आप अपनी उंगलियां चूत पर या लंड पर फेरते हुए इसे पढ़ेंगे। चलिए, बिना टाइम वेस्ट किए कहानी शुरू करते हैं।

ये घटना दो साल पुरानी है, जब मैं कॉलेज के फाइनल ईयर में थी। मेरा रंग गोरा है, शरीर का फिगर उस वक्त 34-28-34 था।

मैं ज्यादातर टाइट जींस और टी-शर्ट पहनती थी, कभी-कभी लेगिंग्स के साथ शॉर्ट कुर्ती। मेरी छाती थोड़ी भारी थी और गांड गोल-गोल, जो जींस में बहुत आकर्षक लगती थी।

उस समय घर में मम्मी-पापा के झगड़े रोज का हिस्सा बन गए थे। बात-बात पर चिल्लाहट, थाली-बर्तन फूटने की आवाजें। तलाक की बात तक चल रही थी। मेरे एग्जाम्स सिर्फ दो हफ्ते दूर थे और घर का माहौल पढ़ने नहीं दे रहा था।

आखिरकार दादा-दादी ने फैसला किया कि मुझे चाचा के घर भेज दिया जाए। चाचा-चाची दूसरे शहर में, हमारे घर से करीब 40 किमी दूर, एक किराए के फ्लैट में रहते थे। चाचा का ऑफिस पास था, इसलिए वो वहां शिफ्ट हो गए थे।

राजेश चाचा उस वक्त 32 साल के थे। उनकी शादी को सिर्फ दो साल हुए थे। मीनू चाची बहुत खूबसूरत थीं, लेकिन थोड़ी शर्मीली। चाचा लंबे, चौड़े कंधों वाले, जिम करने वाले।

उनकी आवाज गहरी और आकर्षक थी। मुझे चाचा से बचपन से ही बहुत बनती थी। वो मुझे हमेशा प्यार से छेड़ते थे।

जब मैं वहां पहुंची तो माहौल बिल्कुल अलग था। शांति, हंसी-मजाक। चाची मुझे अपनी छोटी बहन की तरह मानती थीं। पहले कुछ दिन तो सब ठीक रहा। मैं दिन भर पढ़ाई करती, शाम को चाचा-चाची के साथ टीवी देखती। लेकिन एक रात सब बदल गया।

रात के करीब 1 बजे मेरी नींद खुल गई। बाहर से अजीब सी आवाजें आ रही थीं – हल्की-हल्की आहें, सांसों की तेज आवाज, और कुछ चिकचिक की ध्वनि। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।

मैं चुपके से बिस्तर से उठी और बाहर आई। आवाज चाचा-चाची के बेडरूम से आ रही थी। उनका दरवाजा थोड़ा-सा खुला हुआ था।

मैंने सांस रोके अंदर झांका।

अंदर का नजारा देखकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। चाची पूरी तरह नंगी चाचा के ऊपर सवार थीं। उनकी बड़ी-बड़ी छातियां उछल रही थीं। चाचा का मोटा, लंबा लंड चाची की चूत में पूरी तरह घुसा हुआ था।

चाची ऊपर-नीचे उछल रही थीं और हर उछाल पर जोर से चीख रही थीं – “आह्हह… राजेश… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… उफ्फ्फ… कितना मोटा है तेरा लंड…”

चाचा नीचे से जोरदार धक्के दे रहे थे। उनका लंड चाची की चूत में घुसता-निकलता दिख रहा था। चाची की चूत काफी गीली थी, लंड पर सफेद रस चमक रहा था।


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“हां मेरी रानी… ले मेरी जान… तेरी चूत तो आज बहुत टाइट हो रही है… आह्ह… चूस ले मेरे लंड को अंदर…”

ये लाइव चुदाई देखकर मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई। मेरी चूत अचानक गीली होने लगी।

मैंने कभी पॉर्न तो देखा था, लेकिन ये असली था। चाचा का लंड सच में बहुत मोटा और लंबा था – करीब 7 इंच से ज्यादा। मैं वहीं खड़ी-खड़ी देखती रही। मेरी सांसें तेज हो गईं।

कुछ देर बाद चाची नीचे उतरीं और घोड़ी बन गईं। चाचा उनके पीछे आए, गांड पकड़कर एक झटके में पूरा लंड चूत में ठोक दिया। “आआआह्ह… मर गई… तेरे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी…” चाची चीखीं।

चाचा तेजी से चोदने लगे – धप-धप-धप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। ये Antarvasna Chacha Ki Chudai Ki Kahani आप Vasnastory पर पढ़ रहे है।

मेरा हाथ अनजाने में मेरी लेगिंग्स के अंदर चला गया। मैं अपनी चूत पर उंगलियां फिराने लगी। जितना जोर से चाचा चाची को चोद रहे थे, उतनी ही तेजी से मैं अपनी चूत मसल रही थी।

अचानक मेरे शरीर में एक तीव्र झटका आया। पहली बार मेरी चूत से पानी छूटा। मेरे मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली – “उफ्फ…”

डर लग रहा था कि कहीं आवाज न हो जाए। मैं चुपके से अपने कमरे में वापस आ गई। लेकिन उस रात नींद नहीं आई। बार-बार चाचा का वो मोटा लंड मेरी आंखों के सामने घूम रहा था।

अगले दिन चाचा को देखते ही मेरी नजर उनकी पैंट पर चली जाती। वो नॉर्मल कपड़े पहने थे, लेकिन मुझे लग रहा था जैसे उनका लंड पैंट फाड़कर बाहर आ जाएगा। दिन भर मैं पढ़ने की कोशिश करती, लेकिन मन कहीं और था।

रात को फिर वही हुआ। मैं चुपके से उनके कमरे के बाहर खड़ी हो गई। आज भी वो चुदाई कर रहे थे।

चाची इस बार चाचा के लंड को मुंह में ले रही थीं – “ग्लक… ग्लक…” की आवाज आ रही थी। चाचा उनका सिर पकड़े हुए मुंह में ठोक रहे थे। मैं वहां खड़ी-खड़ी ही दो बार झड़ गई।

इसके बाद ये सिलसिला रोज का हो गया। जब भी चाचा-चाची चुदाई करते, मैं देखती। लेकिन मुझे नहीं पता था कि चाचा मुझे पहले ही देख चुके थे।

एक रात जब मैं अपने कमरे में लौटी, तो बहुत ज्यादा गर्मी हो रही थी। मैंने दरवाजा बंद किया, कपड़े उतारे और पूरी तरह नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई। मेरी उंगलियां अपनी चूत में घुस रही थीं।

आंखें बंद थीं और मुंह से बार-बार निकल रहा था – “आह्ह… चाचा… आपका लंड… मेरी चूत में… चोदिए ना मुझे…”

मैं इतनी मदहोश थी कि मुझे पता ही नहीं चला कब कमरे का दरवाजा खुला और चाचा अंदर आ गए।

मैं पूरी तरह नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी। मेरी टांगें फैली हुई थीं और दो उंगलियां अपनी चूत के अंदर घुसा-घुसाकर फिंगरिंग कर रही थी। आंखें बंद, सांसें तेज।

 मुंह से अनगिनत बार निकल रहा था – “आह्ह… चाचा… राजेश चाचा… आपका वो मोटा लंड… मेरी कुंवारी चूत में डालिए ना… उफ्फ… चोदिए मुझे…”

अचानक मुझे लगा जैसे कोई सांस मेरे चेहरे के पास है। आंख खोलते ही मैं चौंक गई। चाचा मेरे बिस्तर के बिल्कुल पास खड़े थे। उनकी नजर मेरी खुली चूत पर टिकी हुई थी, जहां मेरी उंगलियां अभी भी अंदर थीं। उनकी पैंट में साफ दिख रहा था – एक मोटी सी लकड़ी जैसा उभार।

“प्रिया…” उनकी गहरी आवाज में लालच था।

मैं घबरा गई। हाथ झटके से हटाया और घुटनों से छाती छिपाने की कोशिश करने लगी। “चा-चाचा… आप… यहाँ…?” मेरी आवाज कांप रही थी। शर्म से पूरा चेहरा लाल हो गया।

चाचा ने धीरे से मुस्कुराते हुए मेरे पास बैठ गए। उनका हाथ मेरी जांघ पर पड़ा। गर्म, भारी हाथ। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।

“डरो मत बेटी… मैंने सब देख लिया है। पिछले कई दिनों से तुम हमारे कमरे के बाहर खड़ी होकर देख रही हो ना? चाची को चुदते हुए…”

मैं नजरें झुका ली। बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन मेरी चूत अभी भी गीली थी और उसकी गंध कमरे में फैल रही थी।

चाचा ने मेरी ठोड़ी पकड़कर ऊपर किया। “तुम्हें मजा आ रहा था ना देखकर? बोलो…”


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मैं धीरे से सिर हिला दिया।

“तो आज असली मजा लेते हैं…”

उन्होंने धीरे-धीरे मेरी टांगें अलग कीं। मैं विरोध नहीं कर पाई। उनका मुंह मेरी जांघों की तरफ झुका। पहले हल्के-हल्के किस किए जांघों पर, फिर धीरे से मेरी चूत के ऊपर। उनकी गर्म सांस मेरी क्लिट पर पड़ी। मैं सिहर गई।

“आह्ह…” मेरे मुंह से निकला। ये Desi Sex से भरपूर  Antarvasana Family Hindi Sex Kahani आप Vasnastory पर पढ़ रहे है।

चाचा ने अपनी जीभ बाहर निकाली और एक लंबी चाट मेरी चूत की पूरी लंबाई में दी। “उम्म्म… कितनी मीठी चूत है तुम्हारी प्रिया… कुंवारी है ना?”

“हां… चाचा…” मैं कांपते हुए बोली।

फिर शुरू हुई असली चाट। चाचा मेरी चूत को चूसने लगे। जीभ क्लिट पर घुमाते, कभी अंदर डालते, कभी होंठों से चूसते।

“चूप… चूप… स्लर्प…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मैं बिस्तर पर तड़पने लगी।

“आआह्ह… चाचा… क्या कर रहे हो… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्हह…” मेरी आहें निकलने लगीं।

उनकी जीभ तेज हो गई। दो उंगलियां भी मेरी चूत में घुसाईं और अंदर-बाहर करने लगे। मैं उनकी सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी। “और जोर से… चूसिए… आह्ह… मैं मर जाऊंगी…”

मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। शरीर में तेज झटका। चूत से पानी छूटा और चाचा के मुंह में चला गया। “आआआह्ह… चाचा… निकल गया…”

चाचा ने मुंह उठाया। उनके होंठ मेरे रस से चमक रहे थे। उन्होंने अपनी शर्ट उतारी। चौड़ा सीना, हल्के बाल। फिर पैंट खोली।

जब उनका लंड बाहर निकला तो मेरी सांस अटक गई। वो सच में बहुत मोटा और लंबा था। करीब 7.5 इंच लंबा, मोटाई दो उंगलियों जितनी। टोपा चमकदार लाल, नसें उभरी हुईं।

“चाचा… ये… बहुत बड़ा है…” मैं डरते हुए बोली।

“डरो मत… धीरे-धीरे करूंगा…”

वे मेरे ऊपर आए। मेरे होंठों पर किस किया। पहले हल्का, फिर गहरा। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई।

मैं भी जवाब देने लगी। किस करते हुए उनका हाथ मेरी छातियों पर गया। मेरी निप्पल्स को चिमटकर खींचा, दबाया। “उम्म्म… आह्ह…” मैं कराह रही थी।

किस के बीच उन्होंने मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया (जो मैं पहले से थी)। मेरी छातियों को चूसने लगे। एक-एक करके दोनों स्तनों को मुंह में लेते, जीभ से चक्कर काटते।

“इतनी सुंदर छातियां… चूसने को मन करता है रोज…”

धीरे-धीरे उनका मुंह नीचे आया। फिर लंड मेरी चूत के मुंह पर रखा। टोपा चूत के छेद पर रगड़ने लगे।

“चाचा… धीरे… पहली बार है…” मैंने कहा।

“पता है बेटी… मैं संभाल के करूंगा।”

उन्होंने धीरे से दबाव बढ़ाया। टोपा मेरी सील पर दबा। दर्द हुआ। “आह्ह… दर्द हो रहा है…”


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“बस थोड़ा सा… शांत हो जा…”

एक जोर का धक्का। “फट्” की आवाज के साथ टोपा अंदर घुस गया। मैंने तकिए में मुंह दबाकर चीख दबाई। “मम्मी… आह्हह… बहुत दर्द…”

चाचा रुक गए। मेरे माथे पर किस किए, गालों पर, होंठों पर। धीरे-धीरे छोटे-छोटे धक्के देने लगे। हर धक्के के साथ थोड़ा-थोड़ा लंड अंदर जा रहा था।

“आह्ह… चाचा… धीरे… उफ्फ… भर गया अंदर…”

आखिरकार पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। चाचा मेरे ऊपर लेटे रहे, मेरे शरीर को सहलाते रहे। दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा और जगह लेने लगा एक अजीब सी खुजली और भराव का एहसास।

“अब हिलना शुरू करूं?” उन्होंने पूछा।

मैंने शर्माते हुए सिर हिला दिया।

चाचा ने धीरे-धीरे लंड पीछे खींचा और फिर अंदर डाला। “धप…”

“उम्म्म… आह्ह…”

रफ्तार बढ़ने लगी। अब धप-धप की आवाज आने लगी। चाचा मेरी चूत को अच्छे से चोद रहे थे। “कैसा लग रहा है प्रिया… बोल… तेरी चूत तो मेरे लंड को बहुत जोर से दबा रही है…”

“बहुत अच्छा… चाचा… और जोर से… आह्हह… फाड़ दो मेरी चूत… हां… यही… गहरी डालिए…” मेरी शर्म अब कामवासना में बदल चुकी थी।

वे तेज हो गए। मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और पूरी ताकत से चोदने लगे। हर थप्पड़ पर मेरी छातियां उछल रही थीं। “आआह्ह… चाचा… मर गई… आपका लंड मेरी चूत फाड़ रहा है… उफ्फ… और तेज…”

मैं दो बार और झड़ चुकी थी। चाचा अभी भी चोद रहे थे। आखिर में उन्होंने लंड बाहर निकाला और मेरे पेट, छातियों पर गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य निकाला। “आह्ह… ले मेरी जान…”

श्रेणी: 📁 बाप बेटी
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