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ठंड में भैया के बिस्तर पर चुद गई बहन!

📅 October 30, 2026 👤 Vasnastory 🔥 NEW

भाग: 1 2

ठंड में भैया के बिस्तर पर चुद गई बहन!

Hindi Family Sex Story : सर्दी की ठंडी रात में भैया ने अपने बिस्तर पर चोदी बहन की वर्जिन चूत! पहले उंगलियों से फिर फाड़ा लंड से! और भर दिया गर्म माल चुत के अंदर!

मेरा नाम प्रिया है। मैं 21 साल की हूँ। दिल्ली में रहती हूँ, बीए फाइनल ईयर चल रहा है। लोग कहते हैं कि मैं देखने में काफी प्यारी हूँ – गोरी, लंबे काले बाल, और थोड़ी शर्मीली स्वभाव की।

लेकिन सच तो ये है कि मैं अंदर से बहुत सेंसिटिव और इमोशनल हूँ।

मेरे भैया राहुल हैं, 24 साल के। वो मुझसे तीन साल बड़े हैं।

हम दोनों बचपन से ही बहुत क्लोज रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में वो क्लोजनेस थोड़ी अलग तरह की होती जा रही थी – जिसे मैं खुद भी समझ नहीं पाती थी।

नवंबर का आखिरी हफ्ता था। दिल्ली में सर्दी ने जोर पकड़ लिया था। रातें बहुत ठंडी हो गई थीं। बाहर कोहरा इतना घना होता कि सुबह तक सड़क नजर नहीं आती।

पापा-मम्मी पिछले हफ्ते गांव चले गए थे किसी रिश्तेदार की शादी में। घर में सिर्फ मैं और राहुल भैया थे।

उस शाम मैं अपने कमरे में पढ़ रही थी। कमरे में ठंड इतनी थी कि मेरे हाथ-पैर सुन्न हो रहे थे। मैंने सबसे मोटा स्वेटर पहन रखा था, फिर भी कांप रही थी। आखिरकार मैंने राहुल भैया को आवाज लगाई।

“भैया… मेरे कमरे में हीटर ले आओ ना। बहुत ठंड लग रही है।”

थोड़ी देर बाद भैया हीटर लेकर आए। उन्होंने उसे मेरे बिस्तर के पास रखा और ऑन कर दिया। नारंगी रोशनी कमरे में फैल गई। भैया ट्रैक पैंट और हूडी में थे। उनका बदन हमेशा की तरह गर्म लगता था।

मैंने खुद को कंबल में लपेट लिया और बोली, “भैया, थोड़ी देर यहीं बैठो ना। अकेले में ठंड और ज्यादा लग रही है।”

भैया मुस्कुराए और मेरे बिस्तर के किनारे बैठ गए। मैं धीरे से उनके करीब सरक गई। उनका शरीर गर्म था। मैंने अपना सिर उनके कंधे पर टिका दिया।

“तुम्हारा बदन कितना गर्म है भैया…” मैंने धीरे से कहा।

“तुम तो बर्फ की तरह ठंडी हो गई हो,” उन्होंने हल्के से हंसते हुए मेरी पीठ पर हाथ फेरा।

उनका हाथ मेरे स्वेटर के ऊपर ही था, लेकिन फिर भी मुझे एक अजीब सा करंट सा लगा। हम कुछ देर चुपचाप बैठे रहे। सिर्फ हीटर की हल्की सी आवाज आ रही थी। मैं उनकी सांसें महसूस कर रही थी।

रात के करीब 11 बजे भैया उठने लगे।

“अब सो जाओ प्रिया।”

“भैया… रुकना,” मैंने अचानक कहा। “आज रात मैं तुम्हारे कमरे में सोना चाहती हूँ। अकेले डर भी लग रहा है और ठंड भी बहुत है।”

भैया एक पल को रुके, फिर हल्के से मुस्कुराकर बोले, “ठीक है, आ जाओ।” 

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मैं उनके कमरे में चली गई। उनका कमरा मेरा कमरा से थोड़ा बड़ा था। बिस्तर भी डबल था। हम दोनों लेट गए। मैंने अपना कंबल भी साथ ले लिया था।

मैं उनके बाईं तरफ लेटी थी। हल्की-हल्की ठंडी हवा खिड़की के नीचे से आ रही थी। मैं धीरे से उनके करीब खिसक गई। मेरा हाथ अनजाने में उनकी कमर पर पड़ गया।

“ठंड लग रही है?” भैया ने पूछा।

“हम्म…” मैंने सिर्फ इतना कहा।

उन्होंने अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया। धीरे-धीरे उनकी उंगलियां मेरी कमर पर घूमने लगीं। मुझे अच्छा लग रहा था। मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं।

कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई हैं। मेरा दिल भी तेज धड़क रहा था। मैं जानती थी कि ये सामान्य भाई-बहन वाली नजदीकी नहीं है, लेकिन मैं कुछ कह नहीं पा रही थी।

अगली शाम हम दोनों टीवी देख रहे थे। बाहर सर्दी और बढ़ गई थी। मैं उनके कंधे से सटी हुई थी। फिल्म में एक रोमांटिक सीन आया तो मैंने महसूस किया कि भैया मेरी तरफ देख रहे हैं।

“क्या हुआ?” मैंने शरमाते हुए पूछा।

“कुछ नहीं… बस तुम बहुत प्यारी लग रही हो आज,” उन्होंने धीरे से कहा।

मैंने शर्म से सिर झुका लिया। दिल जोरों से धड़क रहा था।

रात को फिर हम उनके बिस्तर पर ही सोए। इस बार मैं जानबूझकर उनके बहुत करीब लेटी। मेरा सिर उनकी छाती पर था। उनकी हृदय की धड़कन मुझे सुनाई दे रही थी।

उनका एक हाथ मेरी पीठ पर था और धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरक रहा था। मुझे रोमांच हो रहा था, लेकिन डर भी लग रहा था।

“प्रिया…” उन्होंने बहुत धीमी आवाज में मेरे कान में कहा।

“हम्म…” मैंने आंखें बंद रखते हुए जवाब दिया।

“तुम्हें ठंड तो नहीं लग रही ना?”

“नहीं… तुम्हारे पास अच्छा लग रहा है।”

उन्होंने मुझे और पास खींच लिया। अब हमारे शरीर एक-दूसरे से पूरी तरह चिपके हुए थे। मैं उनकी गर्मी महसूस कर रही थी। मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैलने लगी थी।

मैंने सोचा – ये क्या हो रहा है? वो मेरे भैया हैं। लेकिन फिर भी मैं हट नहीं रही थी।

उनका हाथ धीरे से मेरे स्वेटर के अंदर घुसा। उनकी ठंडी उंगलियां मेरी कमर की नंगी त्वचा पर पड़ीं। मैं सिहर गई।

“भैया…” मैंने हल्की सी आवाज में कहा।

लेकिन मैंने उन्हें रोका नहीं।  Desi Incest Sex Story : भैया-बहन की ठंड वाली चुदाई की Antarvasna आप vasnastory.com पर पढ़ रहे हैं!

अगली सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैं भैया की बाँहों में लिपटी हुई थी। उनका एक हाथ मेरी कमर पर था और हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे। हीटर अभी भी धीरे-धीरे चल रहा था। बाहर घना कोहरा था।

मैंने हल्के से हिलकर उन्हें देखा। उनकी आँखें खुली हुई थीं। हमारी नजरें मिलीं। एक पल के लिए दोनों शर्म से चुप हो गए।

“गुड मॉर्निंग…” भैया ने धीरे से कहा।

“गुड मॉर्निंग भैया…” मैंने मुंह में ही कहा और उनकी छाती में अपना चेहरा छिपा लिया।

उनका हाथ मेरी पीठ पर धीरे-धीरे घूम रहा था। स्वेटर के ऊपर से ही, लेकिन फिर भी मेरे शरीर में गर्मी दौड़ गई। मैंने महसूस किया कि मेरे स्तन उनकी छाती से दब रहे हैं।

“रात को अच्छा नींद आया?” उन्होंने पूछा।

“हाँ… तुम्हारे पास सोने में बहुत आराम मिला,” मैंने शर्माते हुए कहा।

हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। न तो मैं हटी, न उन्होंने हाथ हटाया।

दोपहर के समय हम दोनों किचन में थे। मैं चाय बना रही थी। भैया मेरे पीछे खड़े थे। अचानक उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।


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“प्रिया, तुम आज बहुत अच्छी लग रही हो।”

मैं मुड़ी तो देखा वो मेरे बहुत करीब खड़े थे। उनकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। मैंने सिर झुका लिया।

“भैया… ऐसा मत बोलो ना।”

“क्यों? सच तो बोल रहा हूँ,” कहते हुए उन्होंने मेरे बालों को कान के पीछे किया। उनकी उंगलियाँ मेरे गाल को छू गईं। मैं सिहर गई।

शाम को हम दोनों लिविंग रूम में टीवी देख रहे थे। बाहर सर्दी और तेज हो गई थी। मैं उनके कंधे से सटी हुई थी। फिल्म रोमांटिक थी। एक सीन में हीरो हीरोइन को किस कर रहा था।

मैंने महसूस किया कि भैया की सांसें थोड़ी भारी हो गई हैं। उनका हाथ मेरी जाँघ पर था। धीरे-धीरे वो ऊपर की तरफ सरकने लगा।

मैं कुछ नहीं बोली। बस दिल जोरों से धड़क रहा था।

“प्रिया…” उन्होंने धीमी आवाज में मेरे कान में कहा, “तुम्हें ऐसा लगता है जैसे… हम दोनों के बीच कुछ हो रहा है?”

मैं चुप रही। फिर हल्के से सिर हिला दिया।

“मुझे भी… लेकिन अच्छा लग रहा है,” उन्होंने कबूल किया।

मैंने उनकी तरफ देखा। उनकी आँखों में चाहत साफ दिख रही थी। मैंने शर्म से आँखें बंद कर लीं।

रात को फिर हम उनके बिस्तर पर सोने गए। इस बार मैंने खुद ही उनके बहुत करीब लेटने की कोशिश की। मेरा सिर उनकी छाती पर, एक टांग उनकी टांग पर रख दी।

भैया ने मुझे कसकर गले लगा लिया। उनका हाथ मेरे स्वेटर के अंदर घुस गया और सीधे मेरी नंगी कमर पर आ गया। उनकी हथेली गर्म थी। उन्होंने धीरे-धीरे मेरी पीठ सहलानी शुरू कर दी।

“उम्म…” मैं अनायास ही हल्की सी आवाज निकाल बैठी।

उनका हाथ धीरे-धीरे ऊपर चढ़ा। मेरी ब्रा के नीचे तक पहुँच गया। उन्होंने ब्रा के ऊपर से ही मेरी छाती को हल्का दबाया।

“आह्ह…” मैं सिहर गई।

“दर्द तो नहीं हो रहा?” उन्होंने पूछा।

“नहीं… बस… अजीब सा लग रहा है,” मैंने सांस लेते हुए कहा। 

भैया ने मुझे थोड़ा ऊपर खींचा और मेरे गाल पर हल्का किस किया। फिर दूसरे गाल पर। फिर माथे पर। मैं काँप रही थी।

आखिरकार उन्होंने मेरे होंठों पर हल्का-सा किस किया। बस छूकर हट गए। मैंने आँखें खोलकर उन्हें देखा।

दूसरी बार उन्होंने गहरी किस की। उनके होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे। मैं भी धीरे-धीरे जवाब देने लगी। हमारी सांसें एक हो गईं।

किस के दौरान उनका हाथ मेरी छाती पर आ गया। उन्होंने ब्रा के ऊपर से मसलना शुरू कर दिया। मेरी निप्पल्स सख्त हो गई थीं।

“उफ्फ भैया…” मैंने किस के बीच में ही कराहते हुए कहा।

उन्होंने मेरे स्वेटर को ऊपर किया। मैंने विरोध नहीं किया। स्वेटर उतर गया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पजामा में थी।

भैया ने मेरी गर्दन चूमनी शुरू कर दी। फिर कॉलर बोन। फिर धीरे-धीरे छातियों के ऊपरी हिस्से पर।

“आह्ह… भैया… धीरे…” मैं कराह रही थी। ये Hindi Sex Kahani : भैया के बिस्तर पर बहन की पहली चुदाई की पूरी कहानी vasnastory.com पर जारी है

उन्होंने ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी दोनों स्तन बाहर आ गए। ठंडे कमरे में वे सिकुड़ गए थे। भैया ने एक स्तन को हाथ में लिया और धीरे से मसलने लगे।

“प्रिया… तुम्हारी छातियाँ बहुत सॉफ्ट और सुंदर हैं,” उन्होंने गर्म सांसों के साथ कहा।

फिर उन्होंने एक निप्पल को मुंह में ले लिया और चूसने लगे।

“आआह्ह… उमम्म… भैया… क्या कर रहे हो…”


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मेरी आवाज भारी हो गई थी। मैं उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। मेरी चूत में गर्मी और नमी फैलने लगी थी।

भैया दूसरे स्तन पर भी वैसा ही करने लगे। मैं बार-बार कराह रही थी।

“हां… भैया… अच्छा लग रहा है… उम्म्म…”

उनका हाथ धीरे-धीरे मेरे पजामे की नाडी की तरफ सरक रहा था।

भैया का हाथ मेरे पजामे की नाडी पर रुक गया। उन्होंने धीरे से नाडी खोल दी। मैंने हल्का सा कांपते हुए उनकी तरफ देखा, लेकिन कुछ बोली नहीं। मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

कमरे में सिर्फ हीटर की हल्की सी गुनगुनाहट और हमारी भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। बाहर ठंडी हवा खिड़की से टकरा रही थी।

“प्रिया… अगर तुम नहीं चाहती तो बोल दो,” भैया ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा। उनकी गर्म सांस मेरे कान को छू रही थी।

मैंने आँखें बंद कर लीं और बस हल्के से सिर हिला दिया। मतलब — मैं रोकना नहीं चाहती थी।

उन्होंने मेरा पजामा धीरे-धीरे नीचे सरकाया। अब मैं सिर्फ एक पतली सी पैंटी में थी। भैया ने मेरी जाँघों पर हाथ फेरा। उनकी उंगलियाँ ठंडी थीं, लेकिन छूते ही मुझे गर्मी महसूस हो रही थी।

“तेरी जाँघें कितनी मुलायम हैं…” उन्होंने धीरे से कहा।

फिर उनका हाथ मेरी पैंटी के ऊपर आ गया। उन्होंने बाहर से ही हल्का दबाया। मैं सिहर उठी।

“आह्ह… भैया…”

“तू गीली हो चुकी है रे,” उन्होंने गंदी आवाज में कहा। “तेरी चूत से पानी निकल रहा है।”

मैं शर्म से लाल हो गई, लेकिन मेरी चूत और भी गीली हो गई। भैया ने पैंटी का कपड़ा एक तरफ किया और अपनी उंगली सीधे मेरी चूत पर रख दी।

“उफ्फ… आह्ह…” मैं जोर से कराह उठी।

उन्होंने धीरे-धीरे अपनी उंगली ऊपर-नीचे घुमानी शुरू कर दी। मेरी चूत की नमी उनकी उंगली पर लग रही थी। फिर उन्होंने धीरे से एक उंगली अंदर डाल दी।

“आआह्ह… भैया… धीरे… पहली बार है…” मैं कसमसा उठी।

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