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मकान मालकिन ने रेंट माफ कर चोदवाई चूत! Hindi Sex Kahani

📅 October 30, 2026 👤 Vasnastory 🔥 NEW

Desi Antarvasna Story : मकान मालकिन आंटी ने रेंट न चुकाने पर वर्जिन लड़के को पिलाया सुसु! फिर किस्तों में चोदवाई अपनी चूत! पढिए Kamvasna से भरपूर Chudai Kahani!

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम अरविंद है। वैसे तो मैं दिल्ली से हूँ, लेकिन असल में उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र अब 30 साल है मगर ये कहानी 10 साल पुरानी है। मेरी हाइट सामान्य लड़कों जैसी ही है।

मैं आपको आज अपने पहले सेक्स के बारे में बताऊंगा।  

यह Desi Virgin Fuck Story गर्मियों की है। मैं दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई के लिए आया था। मेरे घर परिवार में गुजरे लायक पैसे थे इसलिए मुझे पैसे की तंगी थी, इसलिए मैं सस्ता रेंट वाला रूम ढूंढ रहा था।

आखिरकार, मुझे एक पुराने इलाके में एक छोटा सा घर मिला। 

वहा की मकान मालकिन कंगना आंटी थीं। उनकी उम्र करीब 60 साल थी। वो विधवा थीं, पति की मौत के बाद वे अकेली रहती थीं। उनका घर काफी बड़ा था, लेकिन वो ऊपरी हिस्सा किराए पर देती थीं।

आंटी का फिगर दिखने में अभी भी ठीक-ठाक था ।

वो मस्त गोरी चिट्टी थी, जिस्म से थोड़ी मोटी, लेकिन उनकी चूचियां 38 इंच की भारी-भरकम दिखती थीं, जो साड़ी के ब्लाउज में टाइट होकर बाहर झाँकती रहतीं थी।

उनकी गांड भी मोटी और गोल थी, चलते वक्त लहराती हुई वो बिल्कुल नहीं जैसी लगती थी। 

लेकिन उम्र की वजह से चेहरे पर झुर्रियां उनको एकदम पोर्नस्टार बना देती थी, आंटी बाल सफेद हो चुके थे।

फिर भी, वो खुद को स्टाइलिश रखतीं – कभी-कभी लिपस्टिक लगातीं, और साड़ी में कमर सिकुड़कर बांधतीं आंटी के मोटे चूंचे हमेशा उनके ब्लाउज के बाहर झांकते रहते थे।  

अपने बजट के अनुसार उनसे मैंने रूम ले लिया। किराया 5 हजार महीने का था।

शुरू में तो सब ठीक चला। आंटी कभी-कभी चाय लाकर दे देतीं, और इधर उधर की बातें करतीं थी। जब भी वो मेरे पास आती तो आधे चूंचे उनके बाहर होते बस निप्पल से नीचे का हिस्सा छुपा रहता। 

पढ़ाई और पार्ट-टाइम जॉब की वजह से मेरे पैसे हमेशा टाइट ही रहते। एक महीना तो जैसे तैसे निकल गया, लेकिन दूसरा महीना आते ही रेंट का पैसे कम पड़ गए। मॉम-डैड से मांगा, लेकिन घर में भी तंगी थी। 

आंटी ने पूछा तो मैंने बहाना बनाया – अगले हफ्ते दे दूंगा। लेकिन वो हफ्ता भी बीत गया, फिर धीरे धीरे दस दिन अधिक गुज़र गए।

आंटी अब गुस्सा होने लगीं थी। एक शाम वो मेरे रूम में आईं। वो साड़ी में लिपटी हुई थी, उनका ब्लाउज खूब गहरे गले का था।

उनकी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं। वो बोलीं, “अरविंद बेटा, रेंट का कुछ हुआ? तू तो 2 महीनों में वादा करके भागा जा रहा है। घर का खर्चा कैसे चलेगा?” मैं शर्मा गया, और सिर झुका लिया। 

मैं बोला, “आंटी, बस दो-चार दिन और… जॉब से सैलरी आ जाएगी तो तुरंत दे दूंगा आपको।”वो गुस्से में मुस्कुराईं, “दो-चार दिन? तू जानता है मैं अकेली हूँ। मेरा पेंशन से घर चलता है। 


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तू रेंट न देगा तो मैं तुझे बाहर निकाल दूंगी और पुलिस को बुला लूंगी!” उनकी बातों से मैं घबरा गया। दिल्ली में रूम ढूंढना मुश्किल था, घर के चक्कर में पढ़ाई बीच में छूट जाती।

मैंने उनसे गिड़गिड़ाया, “आंटी, प्लीज! मेरी मजबूरी है। 

कुछ और तरीका बताओ, मैं कुछ भी कर लूंगा।” आंटी की आंखों में अब चमक आ गई। वो मेरी तरफ झुकीं, उनकी गर्म सांस मेरे चेहरे पर लगी।

बोलीं, “कुछ भी करेगा? सच में?” मैंने हां में सिर हिलाया। तभी उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया।

रूम में अंधेरा था, सिर्फ बल्ब जल रहा था। आंटी ने अपनी साड़ी का पल्लू सरका दिया और ब्लाउज के हुक खोले। उनके भारी चूचियां बाहर निकल आईं – उनके काले निप्पल्स, थोड़े ढीले थे लेकिन बड़े बड़े मादक लग रहे थे । 

मैं चौंक गया और पीछे हट गया। “आंटी, ये क्या…” वो हंस दीं फिर बोली “चुप साले! तू रेंट न देगा तो ये ले ले।

मेरी चूचियां चूस, बेटा। जब तक रेंट नहीं देता तब तक मेरा गुलाम बनना पड़ेगा! मैं तुझे अपना सुसु भी पिलाऊंगी मेरी बात मानना तेरी मजबूरी है, अब सोचले यहां रहना है या जाना है।” 

सुसु? मैं समझा नहीं। लेकिन वो जबरदस्ती मुझे खींची फिर मेरे सिर को अपनी चूचियों की तरफ दबा दिया। उनका निप्पल मेरे मुँह में घुस गया वो कड़क होने से मुझे चुभ रहा था। मुझे शुरू में घिन लगी। 

मेरे होठों पर 60 साल की आंटी का दूध? लेकिन आंटी के पास कोई दवा थी शायद, क्योंकि उनके निप्पल्स से सफेद दूध निकलने लगा था। वो स्वाद में मीठा-मीठा व गर्म था।

वो बोलीं, “चूस बेटा, पूरा पी ले इसे। ये तेरी पहली किस्त है रेंट की।” 

मेरे पास अब दूसरा रास्ता नहीं था क्योंकि पुलिस की धमकी पहले ही मिल चुकी थी , मैं मजबूरी में चूसने लगा। उनकी चूचियां मसलते हुए, मैं जीभ से चाटते चाटते उनका दूध पी रहा था।

आंटी की सांसें तेज हो गईं, वो कराहने लगीं – “आआह! उफ्फफ! अच्छा बेटा, ऐसे ही! हमममम चल अब मेरा सुसु भी पी ले। तेरी जवानी देखकर मेरी चूत गीली हो जाती है।” 

मुझे भी धीरे धीरे अजीब सा मजा आने लगा। मेरा भी लंड खड़ा हो गया। मैं पहली बार किसी औरत के दूध का स्वाद ले रहा था। आंटी ने 10-15 मिनट तक मुझे अपना दूध चुसवाया, मैने उनकी दोनों चूचियां गीली कर दीं थी। 

वो फिर बोलीं, “अभी तो शुरुआत है। रेंट पूरा चुकाने के लिए तेरी चुदाई करनी पड़ेगी। आज रात मेरे कमरे में आना। वरना कल सुबह बाहर होगा तू!”

मैं कन्फ्यूज था। डर भी लग रहा था, शर्म भी आ रही थी। 

लेकिन मेरी मजबूरी थी, उसी दिन की रात को 11 बजे मैं चुपके से आंटी के कमरे में गया। उनका रूम नीचे था, वहां एक बड़ा बेड था और, पुरानी साड़ियां बिखरी हुईं थीं। मैने देखा मेरे सामने आंटी नंगी लेटी थीं।

उनका गोरा जिस्म मेरे सामने था उनके पेट पर थोड़ी चर्बी थी, लेकिन चूत के ऊपर बाल सफेद-सफेद चमक रहे थे। उनकी गांड बहुत फैली हुई थी।

वो बोलीं, “आ गया बेटा? नंगा हो जा चल। तेरी लंड से मेरी चूत चोदनी है मुझे।”

ये सब मेरे लिए पहली बार था तो मैं शर्मा गया। मैं पहली बार नंगा हो रहा था वो भी किसी बूढ़ी औरत के सामने।

मेरा लंड 6 इंच का है, वो काफी काला और मोटा था आंटी ने देखा तो ज़बान से लार टपकाई और बोली, “वाह! जवान लंड, उफ्फफ। आ राजा, चूस लूं तुझे।”  

उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और अपना मुँह मेरे लंड पर लगा दिया। वो लंड को जीभ से चाटने लगीं। “उम्म… स्वादिष्ट। तू कुंवारा है न? आज तेरी वर्जिनिटी तोड़ूंगी।” वो वासना से बोली।

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 उनका मुँह गर्म था वो मेरे लंड को दांत लगाकर हल्के से काटतीं तो मैं कराह उठा –“आंटी… आह…” उन्होंने मेरा लंड 5-7 मिनट चूसा होगा, फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गईं और हम 69 पोजीशन में आ गए। उनकी चूत मेरे मुँह पर थी। 

वो भड़कती आवाज़ में बोली “ आगाह! चाट बेटा, मेरी बुर चाट।” मैने अपनी ज़बान आंटी की चूत पर लगाई उनकी चूत का स्वाद नमकीन और गीला था।

उनके चूत वाले सफेद बाल मेरे होंठों में अटकते हुए मुंह में घुस रहे थे। मैं उनको जीभ डालकर चाटने लगा। 

वो भी मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह खा रही थी आंटी मेरे लंड को गले तक ले जातीं फिर चूसते हुए बाहर निकलती। हम दोनों एक दूसरे को चूसते हुए पसीने से तर हो चुके थे।

 फिर आंटी ने बिस्तर के नीचे से कंडोम निकाला शायद पुराना स्टॉक था उनका। वो बोली “पहन ले बेटा, तेरी छड़ी पर छतरी चढ़ाले।” मैंने बिना कुछ कहे उसे पहना फिर वो मेरी कमर पर सवार हो गईं।


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आंटी अपनी चूत को लंड पर रगड़ने लगीं।

“हमममम! आह ओहद्ह! राजा अंदर डाल दे अब हम्मम!” उनकी बात मानते हुए मैंने धक्का दिया। उनकी चूत ढीली थी उम्र की वजह से वो पूरी खुली हुई थी, लेकिन फिर भी गर्म और चिकनी थी।

मेरा पूरा लंड चूत के अंदर घुस गया।

आंटी बेधड़क अब उछलने लगीं – “आआह, चोद बेटा! हमममम जोर से! ओंह्ह्ह मेरी चूत फाड़ दे, आगाह!!”उनकी चूचियां मेरे चेहरे पर लटक रही थीं, मैं भी अब मज़े लेकर उनको चूसने लगा। 

उनके निप्पल से दूध फिर निकला और मेरे मुँह में भर गया। हम दोनों को अब मजा आ रहा था, इस चुदाई में बिल्कुल दर्द नहीं था। आंटी अपनी गांड मेरी जांघों पर ठोक रही थी। ऐसा करते करते 10 मिनट बाद वो चिल्लाईं –

“अआआह! आ रहा मेरा पानी… आह!” आंटी जल्दी से लंड से उठी और उठकर अपनी चूत मेरे मुंह पर रखकर बैठ गई, वो मेरे मुंह पर झड़ती हुई बोली “अआआह, चल पी मेरी जान पी ले इस अमृत को।” 

मैं भी बिना नखरे करे उनके चूत के रस को पी गया, उनकी चूत से काफी सारा पानी निकल रहा था जिसे मैं ज़बान लगाकर चाट रहा था इतने में आंटी ने मेरे चेहरे पर सुसु कर दी।

मैं उस समय पूरा हिल गया अचानक ही उन्होंने अपनी चूत ने गरम झरना मेरे मुंह पर छोड़ दिया था।

मेरी हालत देखकर वो हंसने लगी और बोली “ उन्ह्ह्ह! ओंह्ह्ह! मज़ा आया ना राजा, पी तेरी आंटी का शरबत, पीले अआआह! 

मुझे मजबूरन उसे पीना पड़ा लेकिन तुरंत ही एक तरफ को कुल्ला भी कर दिया, फिर वो लेट गईं। उन्होंने मुझे कुल्ला करते देख और बोलीं, “अभी एक किस्त बाकी। चुपचाप मेरा सुसु पी।”

मैं थक गया था, लेकिन ये उनकी जबरदस्ती थी आंटी ने चूत को मेरे मुंह पर लगाकर दुबारा सुसु की धार मारी मगर अब ज़्यादा नहीं निकला लेकिन जितना भी निकला मुझे वो पीना पड़ा।

उसके बाद मैने उनकी चूचियां फिर से चूसीं जितना भी दूध निकलता मैने उतना चूस चूसकर दूध पीया।

मेरी हालत देखकर आंटी हंस रही थीं, “अच्छा बेटा, रोज आना अब से। रेंट माफ हो जाएगा।” वो मुझे बाहों में जकड़ी लेती रही, मेरे जिस्म से सुसु की बदबू आ रही थी और आंटी थक कर सो चुकी थी तो मैं चुपके से अपने रूम लौटा।

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मगर रात भर मुझे नींद न आई। दिन भर चुदाई के बारे में सोचकर लंड फिर खड़ा हो गया। मैने सोचा, कल भी शायद यही होगा? अगले दिन सुबह आंटी ने मुझे चाय दी, और आंख मारकर।

उनकी हरकत से मैं शर्मा गया। लेकिन रात को उन्होंने मुझे फिर से बुलाया। 

इस बार उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया। वो बोली “झुक बेटा, आज मैं तेरी गांड चाटूंगी।” उनकी जीभ मेरी गांड के छेद में घूमती हुई मुझे बेचैन कर रही थी । मुझे उनकी ज़बान से बहुत गुदगुदी हुई। फिर उन्होंने मेरा लंड पीछे से चूत में डाला। 

आंटी की गांड मोटी थी, जितनी बार लंड उनसे टकराता उतनी बार आंटी की गांड़ लहराती।

वो मुझे उत्तेजित करते हुए बोली “ओंह्ह्ह! मार आआह, जोर से अआआह… 60 साल बाद जवान लंड मिला ओंह्ह्ह! तुझे मर्द बना दूंगी पूरा!” मैंने उनकी बाते सुनकर अपनी स्पीड बढ़ाई। 

मेरी नज़रों के सामने उनकी चूचियां झूल रही थीं। फिर मैंने उन्हें उल्टा लिटाया, और मज़े से चूत चाटी थोड़ी ही देर में उनका पानी निकल गया इस बार वो मुझे मीठा लगा। उस रात उन्होंने फिर से मुझे सुसु पिलाया। 

वो जबरदस्ती मेरा मुँह चूत में दबाकर बोलती “पी ले, ये तेरी दवा है, बेटा।” उनका दूध मैं जितना पीता मुझे वो दूध गर्म ही लगता, मेरा रात का खाना अब पूरा हो गया था मेरा पेट भर गया था और फिर सेक्स का खेल शुरू हो गया। 

हमारी मस्त चुदाई चल रही थी वो मेरी नाखून गाड़तीं हुई कहती जा रही थी– “चोद आअअाब!… फाड़ दे मेरी बुर ओहद्ह!” उस रात चुदाई करते करते मैं बहुत थक गया था, लेकिन मजा भी बहुत आया। 

उस रात भर में हमारी चुदाई के चार राउंड हुए। आखिर में उन्होंने कंडोम उतारकर लंड चूसा।

मैं भी फिर उनके मुंह में झड़ मेरा माल उनके मुँह में गिरा तो उन्होंने सब निगल लिया। कुछ दिन ऐसे ही चले। घर में कोई और नहीं था। आंटी का बेटा-बहू अलग शहर में रहते थे। 

दिन में कभी-कभी आंटी मुझसे किचन में चिपक जातीं थी। एक बार सब्जी काटते वक्त पीछे से उन्होंने मेरा लंड दबाया। मैं घबरा गया, लेकिन पीठ पर मुझे चूत गीली महसूस हुई।

वो मुझे रूम में ले गईं, और एक जल्दी वाली चुदाई को अंजान दिया।  


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इसी तरह एक महीना बीत गया। मेरा रेंट माफ हो गया, लेकिन चुदाई जारी रही। अब आंटी की चुदाई की भूख बढ़ गई थी। “बेटा, तू मेरा पति बन जा और मुझे रोज चोद।” मैं कन्फ्यूज था के ये कैसे हो सकता है। 

मजा तो आ रहा था, लेकिन उम्र का फर्क था। फिर एक दिन मेरे पास मेरा अटके हुए पैसे आ गए।

मैंने सोचा, रेंट दे दूं। लेकिन आंटी बोलीं, “नहीं, अब तू मेरा है अपना है चुदाई से ही भुगतान कर।” फिर एक शाम घर में बिजली गई। पूरे घर में अंधेरा हो गया था तो आंटी ने मुझे बुलाया। 

“आ बेटा, मोमबत्ती जला दे ज़रा।” मैं रूम में घुसा तो वो नंगी थी “ लेकिन अब मैं इस सब की आदत डाल गया था। आंटी की चूचियां चूसना, सुसु पीना – ऊपर का और नीचे का ऊपर करना। 

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एक दिन आंटी की पुरानी दोस्त आई – उनका नाम मीरा आंटी था, वो 55 साल की थी। वो भी विधवा ही थी।

आंटी ने मुझे बुलाया।“बेटा, मीरा को भी चोद दे।” मैं शॉक था। लेकिन फिर वही बात उनकी बात मानना मेरी मजबूरी जो अब मज़ा भी बन गई थी। 

मीरा आंटी दिखने ने गोरी मगर पतली थी। उनकी चूचियां आंटी के मुकाबले छोटी थी। मैंने वो खूब मजे से चूसीं फिर हम तीनों ने मिलकर थ्रीसम करा जिसकी कहानी अगली बार सुनाऊंगा।

उसमें आप पढ़ेंगे कैसे आंटी कंगना मेरी गांड चाट रही थी, मीरा लंड चूस रही। फिर मैंने दोनों की चूत चोदी।

आंटी ने मुझे अपना सुसु पिलाया, मीरा ने भी उनकी देखा देखी मेरे साथ यही करा वो भी रात भर। फिर मीरा चली गई। लेकिन अब आंटी अकेली न थी। रोज नया खेल होता। कभी आउटडोर चुदाई कभी छत पर चुदाई। 

दिल्ली की गर्मी में हमारा पसीना एक जैसा महकता था। हम कभी किचन में होते तो नंगे ही खाना खाते। एक बार मैने खाना बनाते वक्त लंड पीछे से आंटी की गांड़ में डाला जिससे पूरा खाना गिर गया।  

लेकिन एक दिन आंटी बीमार पड़ीं। मोहल्ले का ही डॉक्टर आया। उनकी काफी लंबी दवा चली। मैंने ही आंटी की देखभाल की। वो रिकवर होने पर बोलीं, “बेटा, तूने जान बचाई है मेरी। अब से तू फ्री है चुदाई भी फ्री है और रेंट भी।”  

मगर कुछ महीने बाद मेरा कॉलेज खत्म हो गया अब घर वापसी का समय था मैंने जाना चाहा तो आंटी मुझे पकड़कर रोईं,“मत जा राजा, शादी कर ले मुझसे।”

लेकिन ये मुमकिन नहीं था। अब जब भी दिल्ली आता हूँ, आंटी के पास ही रहता हूं। वो अभी भी मुझे सुसु पिलाती हैं, हां जबरदस्ती मगर अब मजा आता है।

अगली बार कोई नया किराएदार आएगा, तो आंटी उसे भी ऐसा ही सिखाएंगी शायद तब मैं देखूंगा जो भी होगा। वैसे तो आंटी ने मेरी इज़्ज़त ही लूटी थी लेकिन वो दिल की बुरी नहीं थी इसलिए मुझे उनसे प्यार हो गया।  

आपको मेरी यह कहानी कैसी प्लीज कमेंट कर के जरूर बताएं।  

श्रेणी: 📁 आंटी
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