भाई के 9 इंच लंड ने मेरी कुंवारी चूत और गांड फाड़ दी 02
Family Sex Story : नशे में सोए भाई का 9 इंच का लंड मैंने अपनी कुंवारी चूत में उतारा, सील टूटते ही बहा खून… फिर भाई ने फाड़ दी गांड़! मैं तो अब भाई की रखैल बन गई!
अभी तक आपने “भाई के 9 इंच लंड ने मेरी कुंवारी चूत और गांड फाड़ दी!” में पढ़ा :-
“आआआह… भैया…!”
मेरी कुंवारी सील टूट गई। खून की एक पतली धार मेरे जाँघों पर बह निकली। दर्द से मेरी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन सुख भी साथ था। मैं रुकी नहीं। धीरे-धीरे पूरा 9 इंच का लंड अपनी चूत में उतार लिया।
वासना की आग में मैं जल रही थी। मैंने कमर हिलानी शुरू की – ऊपर-नीचे, धीरे-धीरे। “आह… आह… भैया… तुम्हारा लंड… अंदर… पूरा… आह!”
थप-थप… थप-थप… हल्की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं।
5 मिनट तक मैं इसी तरह सवार बनकर चुदाई का मजा ले रही थी। तभी अचानक… विनय भैया की आँखें खुल गईं।
अब आगे :-
विनय भैया की आँखें अचानक खुल गईं। पहले तो वो घबराकर देखने लगा। उसकी नज़र सबसे पहले मेरी नंगी चूचियों पर पड़ी, फिर नीचे जहाँ उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर पूरी तरह घुसा हुआ था।
उसका चेहरा हैरानी, गुस्से और उत्तेजना से भर गया।
“जनवी…? ये… ये क्या कर रही है तू…?” उसकी आवाज़ अभी भी नींद और दवा के असर से भारी थी, लेकिन उसमें गुस्सा साफ़ झलक रहा था।
मैं डर गई, लेकिन रुकी नहीं। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था। लंड अभी भी मेरी चूत में था और वो धीरे-धीरे और सख्त हो रहा था। मैंने काँपते स्वर में कहा, “भैया… सॉरी… मुझे तुम बहुत चाहिए थे… सालों से… मैं… मैं पागल हो रही थी… आह…!”
विनय ने मेरी कमर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उसका हाथ पहले तो झिझका। फिर अचानक उसकी आँखों में वो मर्दाना आग जल उठी जिसका मैं इंतज़ार कर रही थी।
दवा का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था, लेकिन उसके अंदर का भूखा मर्द जाग चुका था।
“तू पागल है जनवी… हम भाई-बहन हैं… ये गलत है…” वो गरजते हुए बोला, लेकिन उसी पल उसने मेरी कमर को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लिया और नीचे से एक ज़ोरदार धक्का मार दिया।
“आआआह…!” मैं चीख पड़ी। उसका पूरा 9 इंच का लंड एक झटके में मेरी चूत की सबसे गहराई तक पहुँच गया। दर्द और सुख का मिश्रण ऐसा था कि मेरी आँखें उलट गईं।
“भैया… हाँ… आह… चोदो मुझे…” मैं बेसुध होकर बोली। ये Antarvasna वाली Bhai Bahan Aur GF Ki Hindi Sex Story आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!
विनय अब पूरी तरह जाग चुका था। उसने मुझे दोनों हाथों से उठाया और पलट दिया। अब मैं उसके नीचे चित लेटी हुई थी और वो मेरे ऊपर। उसकी चौड़ी छाती मेरी चूचियों पर दब रही थी।
घने बाल मेरी नरम चूचियों को खुजला रहे थे। उसने मेरे दोनों पैर अपने कंधों पर रख दिए और तेज़-तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए।
थप… थप… थप… थप… कमरे में सिर्फ़ हमारी चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी।
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“आह… आह… भैया… तेज़… और तेज़… आआह!” मैं चीख रही थी। उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। मेरी चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था। हर धक्के के साथ मेरी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं।
विनय गरज रहा था, “तू मेरी बहन है… फिर भी तूने मुझे ऐसा फँसाया… आज तुझे पूरी तरह चोदकर रख दूँगा… रंडी बनाऊँगा तुझे!”
उसके शब्द सुनकर मेरी चूत और ज़ोर से सिकुड़ने लगी। मैंने अपनी टाँगें उसके कमर पर लपेट लीं और नीचे से कमर उठा-उठाकर उसके धक्कों का जवाब देने लगी।
विनय ने एक हाथ से मेरी चूची पकड़ी और जोर-जोर से मसलने लगा। निप्पल को उँगलियों के बीच दबाया, फिर झुककर उसे मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। दाँतों से हल्का काटा भी।
“उफ्फ… भैया… काटो… चूसो… आह… मैं तुम्हारी हूँ… हमेशा तुम्हारी…”
उसने मुझे पलटा और अब डॉगी स्टाइल में कर दिया। मेरी गांड़ ऊपर थी। उसने मेरी गांड़ पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा।
चटाक! “आह!” मेरी गोरी गांड़ लाल हो गई। फिर दूसरा थप्पड़।
“ये ले… तेरी हिम्मत कैसे हुई भाई का लंड चुराने की…”
उसने मेरी कमर पकड़ी और पीछे से फिर से अपना राक्षस लंड मेरी चूत में ठूँस दिया। अब वो और भी तेज़ चोद रहा था। हर झटके में उसके अंडकोश मेरी चूत से टकरा रहे थे।
मेरी चूत पूरी तरह फूल गई थी। रस और खून का मिश्रण मेरी जाँघों पर बह रहा था।
मैंने तीन बार झड़ चुकी थी। पहली बार तो इतना ज़ोर से कि मेरी चूत से पानी की फुहार निकल गई और पूरा बेड गीला हो गया। लेकिन विनय रुका नहीं। वो लगातार पेलाई कर रहा था।
“भैया… मैं मर गई… आह… बस… नहीं… और… आआह!”
विनय ने मेरी गर्दन के बाल पकड़े, सिर पीछे खींचा और मेरे कान में फुसफुसाया, “अब तू मेरी रखैल है… बहन नहीं… मेरी चुदाई की चीज है तू… समझी?”
मैंने आँखें बंद करके सिर हिलाया, “हाँ भैया… आह… मैं तुम्हारी रखैल हूँ… चोदो मुझे… जितना मन करे चोदो…”
15 मिनट की इस घमासान चुदाई के बाद विनय की रफ्तार और तेज़ हो गई। उसके लंड में फड़कन बढ़ गई। मैं समझ गई कि वो झड़ने वाला है।
“भैया… अंदर… अपना गर्म पानी अंदर भर दो… आह… मेरी चूत में…”
विनय ने एक आखिरी ज़ोरदार धक्का मारा और गरज उठा।
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उसका गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत की गहराई में फूट पड़ा। एक… दो… तीन… चार लंबी फुहारें। मेरी चूत इतनी भर गई कि वीर्य बाहर निकलकर मेरी जाँघों पर बहने लगा।
हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। उसका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर था, धीरे-धीरे नरम हो रहा था। मेरी चूत फड़क रही थी। पूरा शरीर पसीने से तर था।
करीना अभी भी बगल में बेहोश पड़ी हुई थी। वो इस सारी चुदाई से अनजान थी। उसकी साँसें अभी भी समान थीं।
विनय ने धीरे से मेरी ओर देखा। अब उसके चेहरे पर गुस्सा कम था। जगह ले रही थी एक अजीब सी मोहब्बत और वासना। उसने मेरे माथे पर पसीना पोंछा और धीरे से बोला, “जनवी… तूने मुझे पागल कर दिया… अब क्या होगा?”
मैंने उसकी छाती पर सिर रखते हुए कहा, “जो होना था वो हो गया भैया… अब मैं तुम्हारी हूँ। करीना तुम्हारी गर्लफ्रेंड रहेगी… लेकिन रातें… मेरी होंगी।”
विनय कुछ नहीं बोला। बस मेरे बालों में उँगलियाँ फिराने लगा। हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके सो गए।
सुबह जब दवा का असर पूरी तरह खत्म हुआ तो करीना सबसे पहले जागी। वो कन्फ्यूज्ड थी।
“क्या हुआ कल रात? मुझे तो कुछ याद नहीं… हमने कुछ किया भी या नहीं?”
विनय ने शांत स्वर में कहा, “कुछ नहीं यार। जूस में शायद बहुत शुगर था। सबको नींद आ गई।”
करीना हँसी और मान गई। लेकिन जब उसकी नज़र मेरी ओर गई तो मैंने मुस्कुराकर आँख मारी।
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विनय और मेरी नज़रें मिलीं। उस पल हम दोनों की आँखों में एक गुप्त वादा था – अब ये सिलसिला कभी नहीं रुकेगा।
करीना विनय की गर्लफ्रेंड बनी रही। वो दोनों बाहर डेट पर जाते, घूमते, किस करते। लेकिन घर की रातें अब मेरी हो चुकी थीं। हर वह मौका जब मम्मी-पापा सो जाते या बाहर जाते, विनय भैया मेरे कमरे में आ जाते।
कभी-कभी तो हम तीनों की तिकड़ी भी हो जाती, लेकिन ज़्यादातर विनय सिर्फ़ मेरा ही रहता।
मेरी चूत की प्यास तो बुझ गई थी, लेकिन अब मेरी गांड़ में नई आग लग गई थी। मैं सोचने लगी थी कि अगली बार विनय भैया को अपनी गांड़ भी दे दूँ।
उस घटना के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था। बाहर से सब कुछ पहले जैसा ही लगता था – मम्मी-पापा अपनी दिनचर्या में व्यस्त, करीना विनय की ऑफिशियल गर्लफ्रेंड बनी हुई, कॉलेज, ऑफिस, डिनर सब नॉर्मल।
लेकिन अंदर ही अंदर एक गुप्त, गर्म और वर्जित रिश्ता फल-फूल रहा था। ये Desi Sex वाली Vargin Sister Sex Story आप vasnastory.com पर पढ़ रहे हो।
हर रात मैं इंतज़ार करती। जैसे ही मम्मी-पापा अपने कमरे में चले जाते, विनय भैया का मैसेज आ जाता – “आ जा” या बस एक इमोजी 🔥।
मैं चुपके से उनके कमरे में चली जाती। कभी वो मेरे कमरे में आ जाते। हम दोनों बिना एक शब्द बोले एक-दूसरे को खा जाते।
पहले कुछ दिन तो विनय को थोड़ा गिल्ट होता था। चुदाई के बाद वो कहते, “जनवी, ये गलत है… हम रुक जाएँ।”
लेकिन जैसे ही मैं उनकी पैंट के अंदर हाथ डालती और उनके लंड को सहलाती, वो फिर पागल हो जाते। उनका लंड तुरंत खड़ा हो जाता और वो मुझे बिस्तर पर पटक देते।
एक रात मैंने उन्हें पूरी तरह तैयार किया। मैंने एक नई लाल रंग की सेक्सी बेबीडॉल पहनी थी – बहुत छोटी, लगभग पारदर्शी। मेरी चूचियाँ उसमें से साफ़ दिख रही थीं। नीचे सिर्फ़ एक पतली सी स्ट्रिंग पैंटी। बाल खुले, होंठों पर लिपस्टिक।
जैसे ही विनय कमरे में आए, उनकी आँखें फट गईं। “जनवी… तू आज तो… उफ्फ!”
मैंने उन्हें बिस्तर पर धक्का देकर लिटाया और उनकी पैंट उतार दी। उनका लंड पहले से ही आधा खड़ा था। मैंने घुटनों के बल बैठकर उसे दोनों हाथों में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी।
जीभ से सुपाड़े को चक्कर काटती, गले तक ले जाती, फिर बाहर निकालकर थूक से चिकना करती। विनय की साँसें तेज़ हो गईं। उन्होंने मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर ऊपर-नीचे किया।
“चूस… और जोर से चूस मेरी रंडी बहन…”
मैंने पूरा लंड मुँह में ले लिया। गला फूल गया, आँखों में पानी आ गया, लेकिन मैं रुकी नहीं। जब उनका लंड पूरी तरह लार से चमकने लगा तो मैं उनके ऊपर चढ़ गई। इस बार मैंने पीछे मुड़कर रिवर्स काउगर्ल पोज़िशन लिया। मेरी गांड़ उनकी तरफ़ थी।
मैंने लंड को अपनी चूत पर सेट किया और धीरे से बैठ गई। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया। “आआह… भैया… आज बहुत गहरा जा रहा है…”
मैंने कमर हिलानी शुरू की। तेज़-तेज़ ऊपर-नीचे। मेरी गांड़ उनके पेट से टकरा रही थी – पच… पच… पच… की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। विनय ने मेरी गांड़ पकड़ ली और नीचे से धक्के देने लगे।
“तेरी चूत कितनी टाइट है यार… हर बार नई लगती है…”
मैं झड़ गई। मेरे रस से उनका लंड और जाँघें गीली हो गईं। लेकिन वो रुके नहीं। उन्होंने मुझे उठाया, बेड पर पटका और मेरे पैर फैलाकर मिशनरी में घुस गए। अब उनकी रफ्तार और तेज़ थी। हर धक्के के साथ बेड हिल रहा था।
“भैया… आह… मैं फिर… आ रही हूँ… आआह!”
मैंने दूसरी बार झड़ते हुए उनकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। विनय भी झड़ने वाले थे। उन्होंने मेरे होंठ चूस लिए और गरम वीर्य की फुहारें मेरी चूत में छोड़ दीं। हम दोनों पसीने से तर, हाँफते हुए लेट गए।
धीरे-धीरे हमारा रिश्ता और खुल गया। अब हम दिन में भी मौका ढूँढने लगे। कभी मम्मी-पापा बाज़ार गए तो हम तुरंत बाथरूम में घुस जाते। विनय मुझे वॉशबेसिन पर झुकाकर पीछे से चोदते।
कभी किचन में, जब मैं बर्तन धो रही होती, वो पीछे से आकर मेरी स्कर्ट ऊपर कर देते और खड़े-खड़े ही चोद देते।
करीना के साथ भी सब चल रहा था। वो विनय के साथ डेट पर जाती, मूवी देखती, लेकिन असली चुदाई अब मेरे साथ हो रही थी।
एक बार करीना ने मुझे बताया, “जनवी, विनय बहुत अच्छा किस करता है, लेकिन बेड पर अभी तक फुल नहीं गया। वो कहता है समय आने दे।” मैं मन ही मन हँसती – क्योंकि वो समय मेरे साथ बीत चुका था।
धीरे-धीरे मेरी गांड़ की इच्छा बढ़ने लगी। मैंने सोचा अब विनय भैया को अपनी गांड़ भी देनी है। एक रात मैंने उन्हें बताया।
“भैया… आज मेरी गांड़ ले लो…”
विनय की आँखें चमक उठीं। “सच? तू तैयार है?”
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मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। मैंने लुब्रिकेंट जेल लगाया – पहले अपनी गांड़ के छेद पर, फिर उनके लंड पर खूब अच्छे से। मैं घुटनों के बल हो गई, गांड़ ऊपर की। विनय ने मेरी कमर पकड़ी और धीरे से सुपाड़ा गांड़ के छेद पर रखा।
“आराम से… दर्द होगा पहले…” उन्होंने कहा।
धीरे-धीरे उन्होंने दबाव बढ़ाया। सुपाड़ा अंदर घुसा। मैंने दाँत भींच लिए। “आह… भैया… धीरे…”
धीरे-धीरे आधा लंड अंदर चला गया। दर्द बहुत था, लेकिन साथ में एक अजीब सुख भी। विनय रुके रहे, मुझे आदत पड़ने दी। फिर धीरे-धीरे पूरा लंड मेरी गांड़ में उतार दिया।
“उफ्फ… कितनी टाइट गांड़ है तेरी… गर्म…!”
फिर उन्होंने धीमी गति से चोदना शुरू किया। धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। कुछ मिनट बाद दर्द कम हो गया और मजा आने लगा। मैंने खुद कमर हिलानी शुरू कर दी।
“भैया… अब तेज़… चोदो मेरी गांड़… आह… हाँ…!”
विनय ने तेज़ी से पेलाई शुरू कर दी। उनकी जाँघें मेरी गांड़ से टकरा रही थीं। चट-चट-चट की आवाज़ हो रही थी। मैंने एक हाथ अपनी चूत पर रखकर उँगली डाली। दोनों तरफ़ से सुख मिल रहा था।
मैं दो बार झड़ चुकी थी जब विनय भी झड़ गए। उन्होंने पूरा गर्म वीर्य मेरी गांड़ के अंदर भर दिया। जब उन्होंने लंड निकाला तो मेरी गांड़ से सफ़ेद वीर्य बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा।
उस रात के बाद गांड़ चुदाई हमारा नया पसंदीदा खेल बन गया। कभी चूत, कभी मुँह, कभी गांड़ – विनय मुझे हर तरीके से चोदते।
कभी-कभी हम तीनों की तिकड़ी भी हो जाती। एक रात जब करीना घर पर रुकी हुई थी और मम्मी-पापा बाहर थे, मैंने प्लान बनाया। मैंने करीना को थोड़ी शराब पिला दी।
जब वो नशे में थी, मैंने विनय को बुलाया। हम तीनों नंगे हो गए, विनय ने पहले करीना को चोदा!
मैंने उनका लंड चूसा जब वो करीना की चूत में घुसा हुआ था। फिर विनय ने मुझे चोदा जबकि करीना मेरी चूचियाँ चूस रही थी। हम तीनों की आहें, चीखें और थप-थप की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
लेकिन सच कहूँ तो तीनों में भी ज़्यादातर वक्त विनय का ध्यान मुझ पर ही रहता। करीना को वो प्यार से चोदते, लेकिन मुझे तो जानवर की तरह।
अब मेरी चूत और गांड़ दोनों उनकी हो चुकी थीं। मेरी हर इच्छा वो पूरी करते। मैं भी उनकी हर इच्छा मानती। वो कहते “आज मुँह में झड़ना है” तो मैं घुटनों के बल बैठ जाती। कहते “गांड़ दो” तो मैं तुरंत घुटनों पर हो जाती।
हमारा ये Secret Incest Relation अब और भी गहरा और खतरनाक हो चुका था, लेकिन हम दोनों को रोकना नामुमकिन था!
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