फौजी किराएदार ने छेड़ी निशा की कुँवारी चुत!
Antarvasna Sex Story : छत पर फौजी किराएदार ने छेड़ी कुँवारी निशा की जवानी! घर में पटाकर चाटी चूत! 69 में लंड चूसवा पिलाया गर्म वीर्य! शुरू हुई गुपचुप चुदाई!
हेलो दोस्तों, मैं रिया। आज फिर एक नई कहानी लेकर आई हूँ। इस बार पात्र का नाम और जगह का नाम बदल दिया है क्योंकि ये एकदम सच्ची घटना है।
मेरा नाम निशा है। उम्र 21 साल, कद 5 फुट 6 इंच। बूब्स 34, कमर 30 और गाँड 36 इंच। रंग गोरा है, होंठ गुलाबी। बिना ब्रा के भी मेरे बूब्स तने रहते हैं। जब मैं चलती हूँ तो चूतड़ अपने आप हिचकोले खाते हैं और बूब्स हल्के-हल्के उछलते हैं।
मैं कॉलेज के सेकंड ईयर में हूँ। मेरी फ्रेंड्स काफी ओपन माइंडेड हैं। वे अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स की बातें खुलकर करती हैं।
उनकी बातें सुनकर मेरे शरीर में भी अजीब सी गर्मी दौड़ जाती है और चूत गीली हो जाती है। लेकिन मैंने आज तक सेक्स नहीं किया। मेरा मन था कि अपनी सीलपैक चूत सुहागरात में पति को दूँ।
हमारा घर बड़ा है और कई किराएदार रहते हैं। सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर एक कमरा, किचन और बाथरूम के साथ स्टोर रूम है। मम्मी ने वो कमरा किराए पर दे दिया।
किराएदार एक साउथ इंडियन फौजी था। उम्र 28-29 के आसपास, लंबा, मांसल और गेहुआँ रंग का।
शुरुआत में वो बस मुस्कुराता था। जब मैं छत पर कपड़े सुखाने जाती तो वो अपने कमरे के दरवाजे से बाहर खड़ा रहता। पहले-पहले सिर्फ नजरें मिलाता। मैं नजरें फेर लेती। धीरे-धीरे बातें होने लगीं। वो पूछता, “कॉलेज कैसा चल रहा है?” मैं छोटा सा जवाब दे देती।
एक दिन जब मैं कपड़े टाँग रही थी तो वो पास आकर खड़ा हो गया। बोला, “मदद कर दूँ?” मैंने मना कर दिया लेकिन वो हँसा और बोला, “तुम बहुत अच्छी लगती हो।”
मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन गुस्सा नहीं आया। मैंने सिर्फ कहा, “ऐसे मत बोलो।” वो कान पकड़कर “सॉरी” बोल गया। उसकी ये अदा मुझे हँसी आ गई।
अगले कुछ दिनों तक वो सिर्फ बातें करता रहा। कभी पानी मांग लेता, कभी पूछता कि आज कॉलेज में क्या हुआ। मैं भी धीरे-धीरे जवाब देने लगी।
एक शाम जब मैं छत पर घूम रही थी तो वो पास आया और बोला, “निशा, तुम्हारी हँसी बहुत अच्छी है।” मैं शर्मा गई। वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर हल्का सा दबा दिया। मैंने हाथ हटाया नहीं। दिल जोर से धड़क रहा था।
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धीरे-धीरे वो मेरे और करीब आने लगा। जब मैं कपड़े सुखाने जाती तो वो दरवाजा खोलकर खड़ा हो जाता। कभी-कभी अपना लंड हिलाकर दिखाता। मैं चोरी-चोरी देखती।
उसका लंड काला, लंबा और मोटा था। देखकर मेरी चूत में खुजली होने लगती। जब उसकी नजर मुझसे मिलती तो मैं आँखें फेर लेती।
एक दिन वो मौका देखकर मेरे पास आया और हल्के से मेरी कमर पर हाथ रख दिया। मैंने कहा, “क्या कर रहे हो?” वो मुस्कुराया, “कुछ नहीं, बस छूना चाहता था।”
मैंने हाथ नहीं हटाया। वो धीरे-धीरे मेरी गाँड पर हाथ फेरने लगा। मुझे गुस्सा तो आया लेकिन शरीर में गर्माहट भी फैल गई। वो फिर कान पकड़कर सॉरी बोल गया।
अगली बार जब मैं छत पर गई तो वो मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। मेरे कान के पास आकर धीमी आवाज में बोला, “निशा, तुम बहुत सुंदर हो।” फिर उसने मेरे बूब्स पर हल्का सा हाथ रखा।
मैंने “हटो” कहा लेकिन आवाज कमजोर थी। वो मुस्कुराया और हाथ हटा लिया। दिल की धड़कन तेज हो गई थी।
एक शाम वो मुझे अपनी बाहों में हल्के से जकड़ लिया। मैंने विरोध किया लेकिन वो मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिया। लंबा चुंबन लिया। मेरे बूब्स उसकी छाती से दब गए।
मुझे गुस्सा आया लेकिन अंदर से अच्छा भी लगा। जब वो छूटा तो कान पकड़कर सॉरी बोल गया। मैं कुछ नहीं बोली, बस नीचे चली गई।
अब जब भी मैं छत पर जाती, वो इंतजार करता। हम दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आने लगे। वो मेरे बूब्स को हल्के हाथों से दबाता, गाँड पर हाथ मारता। मैं विरोध करती लेकिन पूरी तरह नहीं। एक दिन उसने मुझे अपने कमरे में खींच लिया। बेड पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
मेरे होंठ चूसते हुए मेरे बूब्स दबाने लगा। टी-शर्ट ऊपर उठाकर एक चूची मुँह में ले ली और चूसने लगा। दूसरे को हाथ से मसल रहा था।
मैंने कहा, “छोड़ो… कोई आ जाएगा।” लेकिन आवाज में जोश नहीं था। जल्दी ही मैं ढीली पड़ने लगी। वो बारी-बारी से दोनों बूब्स चूस रहा था। निप्पल्स मोटे होकर तन गए।
वो नीचे की तरफ गया और पाजामे को नीचे खिसकाकर अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया। मैं होश खो बैठी।
मुँह से लंबी सिसकारियाँ निकलने लगीं, “सीईई… आआह… उह्ह्ह… आआह…” मेरी आँखें बंद हो गईं। उसने कब कपड़े उतारे, पता नहीं चला। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
चूत गीली होकर बहने लगी। मैंने अपनी बाहें उसके गले में डाल दीं और उसके होंठ चूम लिए।
तभी नीचे से मम्मी की आवाज आई, “निशा, नीचे आ जा जल्दी। खाना खा ले।” मैंने जल्दी से उसे अलग किया और कपड़े ठीक किए। साँसों को काबू किया और नीचे चली गई।
खाना खाने के बाद बाथरूम में नहाते हुए मैंने अपने बूब्स सहलाए। वे लाल हो गए थे। अब रात को नींद में भी उसका लंड मेरी चूत और गाँड में घुसता नजर आता।
मैं छत पर जाने का बहाना ढूँढने लगी। दरवाजे की कुंडी लगाने लगी। वो बेसब्री से इंतजार करता। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में खो जाते।
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अगले कुछ दिनों तक हम दोनों और करीब आने लगे। मैं अब जानबूझकर छत पर जाती। दरवाजे की कुंडी लगा देती। फौजी भी अपने कमरे का दरवाजा खोलकर इंतजार करता।
जैसे ही मैं पहुँचती, वो मुझे अपनी बाहों में खींच लेता। हम दोनों लंबे समय तक किस करते। वो मेरे बूब्स को टी-शर्ट के ऊपर से दबाता, निप्पल्स को उँगलियों से मसलता। मैं भी अब विरोध कम करती।
मेरे मुँह से हल्की-हल्की आवाजें निकलने लगतीं, “उम्म… आआह…”
एक शाम वो मुझे अपने कमरे में ले गया। दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। मुझे बेड पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया। टी-शर्ट ऊपर उठाकर दोनों बूब्स को बारी-बारी से मुँह में लेकर चूसने लगा। निप्पल्स को जीभ से चाट रहा था।
मैंने कहा, “धीरे… दर्द होता है।” लेकिन आवाज में मस्ती थी। वो मुस्कुराया और और जोर से चूसने लगा। मेरे बूब्स लाल हो गए।
वो नीचे की तरफ सरक गया। पाजामे और पैंटी दोनों नीचे खिसका दी। मेरी चूत उसके मुँह के सामने थी। उसने अपनी जीभ चूत के होंठों पर रखी और चाटना शुरू किया। मैं कराह उठी,
“आआह… उह्ह्ह… आआह…” मेरी आँखें बंद हो गईं। वो जीभ को अंदर तक डाल रहा था। मेरी चूत से पानी बहने लगा। मैंने उसके सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया। “और… आआह… उह्ह्ह…” मेरे मुँह से निकल रहा था।
वो ऊपर आया और अपने कपड़े उतार दिए। उसका काला, लंबा और मोटा लंड मेरे सामने खड़ा था। मैंने उसे हाथ में पकड़ा। बहुत गर्म और कड़क था। वो बोला, “मुँह में लो ना।”
मैंने हिचकिचाते हुए सुपारे को मुँह में लिया। शुरू में अजीब लगा लेकिन जल्दी ही आदत हो गई। मैं धीरे-धीरे चूसने लगी। वो मेरे सिर पर हाथ रखकर आगे-पीछे कर रहा था।
“आआह निशा… और गहराई से… उम्म…” उसकी आवाज काँप रही थी।
हम दोनों 69 में आ गए। वो मेरी चूत को जोर-जोर से चूस रहा था और मैं उसके लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी।
मेरी सिसकारियाँ निकल रही थीं, “सीई… आआह… उह्ह्ह… आआह…” उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर घूम रही थी। मैं बार-बार झड़ने के करीब पहुँच रही थी।
अचानक मेरी चूत सिकुड़ गई और ढेर सारा पानी उसके मुँह में निकल गया। वो सारा पानी पी गया। मैं काँप रही थी। “आआह… उह्ह्ह… मैं गई… आआह…”
वो खड़ा हुआ और मुझे बैठा दिया। अपना लंड मेरे मुँह में डालकर धक्के लगाने लगा। लंड बड़ी मुश्किल से मुँह में जा रहा था। गले तक पहुँच रहा था। मुँह से फच-फच की आवाज आ रही थी।
वो मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़े हुए था। अचानक उसने लंड को जड़ तक गले में ठूँस दिया और गर्म वीर्य मेरे मुँह में भर दिया। सारा वीर्य मेरे गले से नीचे उतर गया।
मैंने निगला। वो लंड निकालकर मेरे होंठ चूमने लगा। मुझे अपनी चूत के पानी का स्वाद उसके होंठों पर मिला।
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मैंने कहा, “कितना गर्म था… सारा पेट में चला गया।” वो मुस्कुराया, “तुम्हारी चूत का पानी बहुत स्वादिष्ट है।” हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे।
थोड़ी देर बाद फिर से तैयार हो गए। वो फिर मेरी चूत चाटने लगा और मैं उसके लंड को मुँह में लेकर सुपारे को जीभ से कुरेदने लगी। मेरी कराहें फिर से शुरू हो गईं,
“आआह… उह्ह्ह… और… आआह…”
तभी मेरा फोन बजा। मम्मी का फोन था। मैंने जल्दी से कपड़े पहने और बाहर निकल गई। बाल्टी उठाकर नीचे चली गई। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। चूत गीली थी और मुँह में वीर्य का स्वाद बाकी था।
अब हम दोनों कोई मौका नहीं छोड़ते थे। जब भी मौका मिलता, छत पर या उसके कमरे में चले जाते। वो मेरी चूत चाटता, मैं उसका लंड चूसती। हम दोनों एक-दूसरे का पानी चखते।
लेकिन अभी तक मेरी सील नहीं टूटी थी। हर बार मंजिल के करीब पहुँचकर रुक जाते। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ता, सुपारा अंदर तक जाता लेकिन पूरी तरह नहीं घुसता। मैं डरती थी और वो भी जबरदस्ती नहीं करता।
लेकिन दोनों के अंदर की आग बढ़ती जा रही थी।
हर बार हम दोनों ने एक दूसरे का पानी बहुत स्वादिष्ट तरह से निकाला और चखा! लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंच पाए हर बार मंजिल तक पहुंच कर रह जातें!
लेकिन जिस तरह से हम दोनों ही एक दूसरे के नजदीक आ गए तो जल्दी ही मेरी सील पैक चुत में फौजी किराएदार का लन्ड मेरी चुत में जड़ तक जाकर मेरी चुत में खून खराबा करते हुए मेरी सील तोड़ कर मेरी चुत का उद्घाटन जरुर करेगा!
आगे जानिए कैसे फौजी ने मेरी सील पैक चुत को तहस-नहस करके मेरी चुत की सील तोडी!
आगे की कहानी : फौजी किराएदार ने छेड़ी निशा की कुँवारी चुत! 02
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