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माँ-दादी की हवस से बहन की कुंवारी चूत तक! भाग – 03

📅 October 29, 2026 👤 Vasnastory 🔥 NEW

Family Sex Story : कैसे भईया ने माँ और दादी के बाद – बहन की कुंवारी सील पैक चूत फाड़ी! फिर आई माँ और दादी की बारी! भैया ने तीनों को चोदा और भर दिया चुत में माल!

अभी तक आपने “दादी ने माँ के बाद बेटे का मोटा लंड चूसा! भाग – 02” में पढ़ा :-

“आह… हां बेटा… धीरे… उफ्फ्… जीभ अंदर… हां… दादी गर्म हो रही है…” उनकी चूत से पानी निकल रहा था। वो पहली बार जोर से झड़ीं, शरीर कांप उठा। “राहुल… दादी झड़ गई… आह…”

फिर उन्होंने मुझे चित लिटाया। “अब दादी ऊपर आएगी।” वो मेरे लंड पर बैठीं। धीरे-धीरे पूरा लंड अपनी चूत में उतारा। “उफ्फ… भर गया… तेरे दादा के बाद इतना मोटा… आह…”

दादी ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके ढीले स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर जोर से मसला। “दादी… आपकी चूत बहुत गर्म है… कस के पकड़ रही है…”

“हां दादा… चोद अपनी दादी को… जोर से… आह… आह… हां… गांड भी मारना आज…” उनकी सांसें फूल रही थीं, उम्र के कारण थोड़ी तेज हो जातीं, लेकिन वो रुक नहीं रही थीं।

मैंने उन्हें doggy style में किया। पीछे से लंड घुसाया। दादी चीखी, “आआह… गहरा… फाड़ दे… मार जोर से…”

मैं उनकी कमर पकड़कर तेज धक्के मार रहा था। चट-चट की आवाज पूरे कमरे में। दादी तकिए में मुंह दबाए कराह रही थीं – “हां… हां… दादी की गांड भी ले ले… उफ्फ्…”

हमने missionary में फिर बदला। उनकी टांगें मेरी कमर पर। मैं तेजी से चोद रहा था। “दादी… मैं अंदर झड़ना चाहता हूं…”

“हां बेटा… भर दे… दादी की चूत में अपना रस… pregnancy तो नहीं होगा, लेकिन भर दे पूरी…”

लगभग 35-40 मिनट तक wild चुदाई चली। दादी 5 बार झड़ चुकी थीं। आखिरकार मैं भी झड़ा – पूरा गर्म वीर्य उनकी चूत के अंदर। दादी कांप उठीं। “ले… ले लिया दादी ने… अच्छा लगा बेटा…”

Sex के बाद realistic aftercare। दादी थक गई थीं। मैंने उन्हें पानी पिलाया, पसीना पोछा, उनके स्तनों और चूत पर हल्का तेल लगाया। वो मेरी गोद में सिर रखकर लेटीं।

 “उम्र हो गई है राहुल… इतनी जोर की चुदाई सहन नहीं होती… लेकिन मजा आया बहुत। तेरी मां को मत बताना अभी।”

हम देर तक लिपटे रहे। दादी ने कहा, “ये परिवार की मजबूरी है… लेकिन दादी अब तेरी औरत भी है।”

उस दिन शाम को फिर एक राउंड हुआ – इस बार shower में। दादी को दीवार से लगाकर खड़े-खड़े चोदा। पानी के साथ चुदाई का मजा दोगुना।

अब आगे :-

दादी के साथ संबंध शुरू होने के बाद घर में एक अजीब सी गर्म हवा बह रही थी। मां और दादी दोनों अब मुझे अपनी आंखों से अलग तरह देखती थीं। लेकिन सबसे मुश्किल अंजलि (18 साल) के साथ था।

वो मेरी छोटी बहन थी – अभी स्कूल जाती, निर्दोष, कोमल। उसके साथ कुछ भी गलत होने का ख्याल मुझे खुद को अपराधी महसूस कराता था।

अंजलि बहुत प्यारी थी। पतला शरीर, छोटे-छोटे उभरते स्तन, लंबे बाल और बड़ी-बड़ी आंखें। वो मुझे “भैया” कहकर पुकारती और हर काम में मेरी मदद करती। लेकिन अब मैं उसकी तरफ देखते वक्त खुद को रोकता था।

शुरुआत बहुत छोटी चीजों से हुई।

सुबह जब वो स्कूल जाने के लिए तैयार होती, मैं उसे पानी देता। कभी उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों को छू जातीं। वो शरमाकर मुस्कुरा देती। “भैया, आजकल आप बहुत थक जाते हो।” मैं बस सिर हिला देता।


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धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ीं। शाम को पढ़ाई कराते वक्त वो मेरे पास बैठती। कभी उसका घुटना मेरे घुटने से लग जाता। मैं हटाता नहीं। एक दिन उसने पूछा, “भैया, मां और दादी आपको इतना क्यों छूती रहती हैं?”

मेरा दिल धड़क गया। “कुछ नहीं… मालिश करती हैं थकान के लिए।”

अंजलि चुप हो गई, लेकिन उसकी नजरें अब मेरे शरीर पर थोड़ी ज्यादा टिकने लगीं।

पहला emotional crack तब आया जब वो एक दिन रोते हुए आई। “भैया, स्कूल में लड़कियां कह रही थीं कि अब मैं बड़ी हो गई हूं… मुझे डर लगता है।” मैंने उसे गले लगा लिया। उसका नरम शरीर मेरे सीने से लगा।

काफी देर तक गले लगाए रहे। उसकी सांसें मेरी गर्दन पर। मैंने उसके बाल सहलाए। “भैया है ना तेरे साथ।”

उस दिन से वो मेरे पास ज्यादा आने लगी। पढ़ाई के दौरान मेरी गोद में बैठकर पढ़ती। “भैया, आराम से पढ़ाओ ना।” उसका छोटा सा शरीर मेरी गोद में। मैं उसके कंधे पर हाथ रखकर समझाता।

धीरे-धीरे स्पर्श बढ़े। कभी मैं उसके माथे पर किस कर देता, “शाबाश” कहकर। वो शरमाती। कभी वो मेरी छाती पर सिर रखकर लेट जाती। “भैया, आपकी गर्मी अच्छी लगती है।”

एक दोपहर जब मां-दादी खेत गए, अंजलि ने कहा, “भैया, मेरी पीठ में दर्द है। मालिश कर दोगे?”

मैंने हिचकिचाते हुए हां कहा। वो पेट के बल लेट गई। मैंने उसकी कमीज ऊपर की। उसकी नरम, गोरी पीठ। मैंने हल्के हाथ से मालिश शुरू की। अंजलि “आह… अच्छा लग रहा है भैया…” कराह रही थी।

मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने खुद को रोका।

इसके बाद कई दिन तक सिर्फ मालिश। कभी पीठ, कभी पैर। अंजलि धीरे-धीरे खुलने लगी। “भैया, आप मां और दादी को भी मालिश करते हो ना? मुझे भी पूरा शरीर दर्द करता है।”

एक शाम उसने खुद अपनी कमीज उतार दी। छोटे-छोटे स्तन ब्रा में। “भैया… देखो ना… ये भी दर्द करते हैं।”

मैंने हल्के हाथ से मालिश किया। अंजलि आंखें बंद करके कराह रही थी – “उफ्फ… हां भैया… धीरे… अच्छा लग रहा है…”

मैंने guilt में कहा, “अंजलि, ये गलत है। तू मेरी बहन है।”

उसने आंखें खोलीं। “लेकिन भैया… मुझे अच्छा लगता है। मैं डरती हूं बाहर के लड़कों से। आप तो मेरे भैया हो… आप मुझे कभी दुख नहीं दोगे ना?”

उसकी बात में innocence और चाहत दोनों थे। मैंने उसे गले लगा लिया। उस दिन सिर्फ गले लगाना और हल्का किस (माथे और गाल पर)।

धीरे-धीरे ये सिलसिला बढ़ा। कभी shower में उसकी पीठ धोना, कभी रात को बिस्तर पर लेटकर बातें करते हुए उसके शरीर को सहलाना। guilt दोनों को सता रहा था, लेकिन attraction भी बढ़ रहा था।

अंजलि के साथ ये emotional closeness अब रोज की आदत बन गई थी। लेकिन मैं खुद को बार-बार याद दिलाता – “वो मेरी छोटी बहन है। सिर्फ 18 साल की। आगे मत बढ़।” फिर भी रुक नहीं पा रहा था।

एक हफ्ते बाद एक शाम की बात। बिजली चली गई थी। गर्मी बहुत थी। हम दोनों छत पर चटाई बिछाकर लेटे थे। अंजलि मेरे पास आई और बोली, “भैया, आज बहुत गर्मी है। आपके पास सो जाऊं?”

मैंने हां कहा। वो मेरी बांह के नीचे सिर रखकर लेट गई। उसका नरम शरीर मेरे शरीर से लगा हुआ था। उसकी सांसें मेरी छाती पर पड़ रही थीं। काफी देर तक चुप्पी रही। फिर उसने धीरे से पूछा,

“भैया… मां और दादी आपके साथ जो करती हैं… वो मुझे भी अच्छा लगेगा?”

मेरा शरीर सख्त हो गया। “अंजलि… वो सब गलत है। तू अभी छोटी है।”

उसने मेरी छाती पर उंगली फिराते हुए कहा, “लेकिन मुझे भी अच्छा लगता है जब आप मुझे छूते हो। डर भी लगता है… लेकिन आपसे डर नहीं लगता।”

मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। उसकी छोटी छाती मेरी छाती से दब रही थी। हम दोनों की सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके माथे पर, फिर गाल पर, फिर बहुत धीरे से होंठों पर हल्का किस किया।

अंजलि कांप गई, लेकिन दूर नहीं हटी। “भैया… गुदगुदी हो रही है… लेकिन रुकना मत।”

उस रात बस किस और हल्के स्पर्श तक सीमित रहा। मैंने उसके स्तनों को कपड़ों के ऊपर से हल्का छुआ। वो शरमा गई, लेकिन “भैया… अच्छा लग रहा है” कहा।

अगले दिन पढ़ाई के दौरान वो मेरी गोद में बैठी। इस बार उसने खुद अपनी कमीज के बटन खोले।

“भैया… आज बिना कपड़े के मालिश करो ना।” उसके छोटे, नरम स्तन सामने थे। गुलाबी निप्पल्स। मैंने बहुत धीरे से छुआ। अंजलि “आह…” कर के सिहर गई।

“दर्द हो रहा है भैया?” मैंने पूछा।

“नहीं… अच्छा लग रहा है… और छुओ ना।”

मैंने हल्के हाथ से मसला। अंजलि मेरी गोद में कराह रही थी। उसकी छोटी चूत मेरी जांघ पर दब रही थी। वो गीली हो रही थी – मैं महसूस कर सकता था। लेकिन उस दिन भी मैंने आगे नहीं बढ़ाया। सिर्फ स्तन की मालिश और किस।


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रोज की दिनचर्या में ये छोटे पल जुड़ते गए। सुबह नहाते वक्त वो दरवाजा खुला छोड़ देती। मैं अंदर जाकर उसकी पीठ धोता। शाम को रसोई में पीछे से हल्का लगकर खड़ा हो जाता। वो शरमाती, लेकिन खुद पीछे धकेल देती।

guilt मुझे खा रहा था। एक रात मैंने उससे कहा, “अंजलि, हम जो कर रहे हैं वो बहुत गलत है। तू मेरी बहन है।”

उसने मेरी आंखों में देखकर कहा, “भैया, मैं जानती हूं। लेकिन बाहर के लोग मुझे डराते हैं। आप मुझे प्यार करते हो ना? तो इसमें बुरा क्या है? मैं खुद चाहती हूं।”

उसकी innocence और lust का मिश्रण मुझे पागल कर रहा था।

धीरे-धीरे foreplay heavy होने लगा। एक दोपहर जब घर खाली था, अंजलि ने कहा, “भैया, मुझे नीचे भी दर्द होता है। देखोगे?”

उसने अपनी फ्रॉक ऊपर की। छोटी, गुलाबी, बिना बालों वाली चूत। मैंने उंगली से छुआ। अंजलि जोर से कांपी। “आह… भैया… गुदगुदी… लेकिन और करो…”

मैंने बहुत धीरे से चाटना शुरू किया। अंजलि पागल हो गई – “भैया… क्या कर रहे हो… आह… आह… बहुत अच्छा… मत रुको…”

अंजलि की चूत चाटते हुए मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। उसकी छोटी, टाइट, गुलाबी चूत से मीठा पानी निकल रहा था। अंजलि दोनों हाथों से मेरे सिर को दबाए हुए थी।

“भैया… आह… क्या हो रहा है… बहुत अच्छा लग रहा है… मत रुको… आह… आह…”

उसकी कमर हिल रही थी। मैंने उंगली धीरे से अंदर डाली। बहुत टाइट थी।

अंजलि चीख उठी, “भैया… दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना मत…” मैंने धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर की। कुछ मिनट बाद वो पहली बार झड़ गई – पूरा शरीर कांप उठा। “भैया… मैं कुछ हो गया… आ गई… आह…”

मैंने उसे गोद में उठाया। वो थर-थर कांप रही थी। “भैया… ये क्या था? बहुत मजा आया… लेकिन डर भी लगा।”

मैंने उसके बाल सहलाए। “ये orgasm है अंजलि। लेकिन हम आगे नहीं बढ़ेंगे। तू अभी छोटी है।”

लेकिन अंजलि ने मेरी आंखों में देखा। “भैया… मैं भी आपको देना चाहती हूं। आपका वो… बड़ा वाला… मुझे दिखाओ ना।”

मैंने लुंगी हटाई। मेरा 9 इंच का खड़ा लंड बाहर आ गया। अंजलि की आंखें फैल गईं। “इतना बड़ा… भैया… ये अंदर कैसे जाएगा?”

“नहीं जाएगा अंजलि। हम सिर्फ छूकर ही…”

लेकिन वो मेरे लंड को हाथ में ले चुकी थी। “गर्म है… और सख्त।” उसने धीरे-धीरे मालिश शुरू की। मैं कराह उठा।

उस दिन हमने mutual touching किया। मैंने उसकी चूत उंगलियों से, वो मेरे लंड को हाथ से। दोनों झड़े। aftercare में वो मेरी छाती पर लेटी रही। “भैया… मुझे प्यार है आपसे।”

अगले कुछ दिन tension और बढ़ गई। हम छुप-छुपकर मिलते। कभी रसोई में, कभी बालकनी में। अंजलि अब bolder हो गई थी।

एक दोपहर घर खाली था। अंजलि ने कहा, “भैया… आज पूरा करना चाहती हूं। मुझे अंदर ले लो।”

मैंने बहुत हिचकिचाया। “दर्द होगा अंजलि। बहुत।”

“मैं सह लूंगी… आप धीरे करना।”

मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। बहुत तेल लगाया। उसके स्तन चूसे, चूत चाटी, उंगलियां डालीं। वो कई बार झड़ चुकी थी। फिर लंड रखा।

“आराम से भैया…” उसकी आंखों में डर और trust दोनों थे।

मैंने बहुत धीरे धक्का मारा। सिर्फ सुपारा अंदर गया। अंजलि चीखी, “आह… दर्द हो रहा है भैया…” आंसू निकल आए।

मैं रुक गया। किस किया। “रुकूं?”

“नहीं… जारी रखो… मुझे आपकी हो जाना है।”

धीरे-धीरे मैंने पूरा लंड अंदर किया। अंजलि रो रही थी, लेकिन कमर हिला रही थी। “भैया… भर गया… आह… चोदो अब… धीरे…”

मैं बहुत धीरे-धीरे चोदने लगा। दर्द के साथ-साथ उसे भी मजा आने लगा। “भैया… अब तेज… आह… हां… अच्छा लग रहा है…”

हमने 15-20 मिनट तक चुदाई की। अंजलि 3 बार झड़ गई। आखिर में मैंने बाहर निकालकर उसके पेट पर झड़ दिया।

aftercare बहुत लंबा। मैंने उसे गर्म पानी से साफ किया, गोली दी, मालिश की, गले लगाकर रोने दिया। “भैया… दर्द हुआ, लेकिन खुश हूं। अब मैं भी आपकी हूं।”


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इसके बाद अंजलि पूरी तरह खुल गई। लेकिन guilt हम तीनों (मां, दादी, अंजलि) को सता रहा था।

अंजलि के साथ पहली बार पूरा संबंध बनाने के बाद घर की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। अब चारों — मां प्रिया, दादी सावित्री, बहन अंजलि और मैं — एक गुप्त दुनिया में जी रहे थे।

बाहर से सब सामान्य था: खेतों में मेहनत, भैंसों का दूध, अंजलि की पढ़ाई, गांव की रस्में। लेकिन अंदर एक गर्म, निषिद्ध bond बन गया था।

रोज की दिनचर्या अब और गहरी हो गई। सुबह दूध दुहने के बाद कभी मां के साथ छप्पर में तेज चुदाई, दोपहर में दादी के कमरे में धीमी, अनुभवी चुदाई, और शाम को अंजलि के साथ कोमल, प्यार भरा sex।

कभी-कभी तीनों साथ भी आ जातीं (जिसकी स्टोरी जल्द ही आएगी!) – मां और दादी अंजलि को सिखातीं, मैं तीनों को संभालता।

लेकिन guilt कभी खत्म नहीं हुआ।

एक रात चारों नंगे लेटे थे। मां ने कहा, “राहुल… हमने जो किया है, वो समाज कभी माफ नहीं करेगा।”

दादी बोली, “परिवार के अंदर है तो ठीक है… लेकिन बच्चे…”

अंजलि मेरी छाती पर सिर रखे हुए बोली, “भैया, मुझे आपसे बच्चा चाहिए… लेकिन डर भी लगता है।”

मैं चुप था। मेरे मन में भी सवाल थे — ये रिश्ता कितने समय तक छुपा रहेगा? अगर अंजलि प्रेग्नेंट हो गई तो? गांव में किसी को पता चल गया तो?

फिर भी शारीरिक भूख और emotional dependency हमें रोक नहीं पा रही थी।

कुछ महीने बाद अंजलि की शादी की बात आने लगी। मां और दादी सोच रही थीं। अंजलि रो-रोकर कहती, “भैया, मैं किसी और के पास नहीं जाना चाहती।”

मैंने उसे गले लगाया। “जो होना है, होगा। लेकिन तू हमेशा मेरी रहेगी।”

रात को चारों का आखिरी wild session हुआ — पूरा घर गूंज रहा था moans से। मां की चूत, दादी की गांड, अंजलि की टाइट चूत — सब मेरे लंड से भरी हुई थीं। creampie, aftercare, tears, प्यार, guilt… सब मिला हुआ।

सुबह होते ही जीवन फिर सामान्य दिखने लगा।

लेकिन अंदर…

अब सवाल ये था — ये गुप्त परिवारिक रिश्ता कितने दिन चलेगा? अंजलि की शादी हो जाएगी या नहीं? मां के पेट में मेरी औलाद आएगी या दादी की उम्र इस आग को बर्दाश्त कर पाएगी?

हम चारों जानते थे कि ये रास्ता खतरनाक है। फिर भी… रुक नहीं रहे थे, क्योंकि परिवार अब सिर्फ खून का नहीं, वासना और प्यार का भी हो चुका था।

तो दोस्तों अगर इसके आगे की पूरी Parivarik Wali Family Group Sex Story चाहिए तो नीचे कॉमेंट करे और साथ में यह भी बताए की कहानी कैसे लगी?

श्रेणी: 📁 भाई बहन
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