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मालिश से शुरू हुई माँ की चूत चुदाई!

📅 October 31, 2026 👤 Vasnastory 🔥 NEW

Family Sex Story : शराबी पति को नींद की गोली खिलाकर प्यासी माँ ने अपने 19 साल के बेटे से मालिश के बहाने चूत फड़वाई! मोटे लंड की चुदाई से माँ बनी बेटे की रखैल!

हैलो दोस्तों, मेरा नाम दीपक है। मैं 19 साल का हूँ और अभी 12वीं क्लास में पढ़ रहा हूँ। हमारे घर में माँ, पिताजी और मैं रहते हैं। मेरे दोनों बड़े भाई शादी के बाद अलग शहर चले गए।

पिताजी मजदूरी करते हैं और शाम को शराब पीकर घर आते हैं। माँ घर संभालती हैं।

उनका नाम राधा है। उम्र 42 साल। गाँव की रहने वाली होने के कारण उनका शरीर भरावदार और गोरा है – भारी-भारी स्तन, चौड़ी कमर, मोटी जांघें और नमक-मिर्च वाली आकर्षक चेहरे की खूबसूरती।

पिताजी के शराबी स्वभाव की वजह से माँ अक्सर तनाव में रहती थीं। घर में रोज लड़ाई-झगड़ा होता।

एक गर्मी की शाम की बात है। हम दोनों छत पर बिछौना बिछाकर लेटे हुए थे। पिताजी अभी तक नहीं आए थे। माँ ने लंबी सांस ली और बोलीं,

“बेटा दीपक… तेरे पिताजी की वजह से मेरी जान निकल रही है। रोज शराब पीकर आते हैं, गाली देते हैं, मारते हैं। कोई उपाय बताओ ना…”

मैंने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा, “माँ आप चिंता मत करो। मैं कल बाजार से नींद की गोलियाँ ला दूंगा। उनकी शराब में मिला दिया करो। वो पीकर गहरी नींद सो जाएंगे और आपको परेशान नहीं करेंगे।”

माँ ने मेरी तरफ देखा और थकी हुई मुस्कान दी।

अगले दिन मैंने गोलियाँ ला दीं। माँ रोज एक गोली पिताजी की शराब में मिलाने लगीं। असर कमाल का था। पिताजी खाना खाकर सीधे सो जाते। घर में शांति छा गई।

मैं स्कूल के बाद रोज कसरत करता था। मेरा शरीर हष्ट-पुष्ट और मजबूत हो गया था। माँ मुझे देखकर खुश होतीं। कभी-कभी मेरी बाहों पर हाथ फेरतीं और कहतीं, “मेरा बेटा तो अब पहलवान बन गया है।”

एक शाम माँ थककर बोलीं, “बेटा, आज पूरा बदन दर्द कर रहा है। कमर थोड़ी दबा दे ना…”

मैंने तुरंत कहा, “माँ आप लेट जाओ। मैं पूरा मालिश कर दूंगा।”

माँ ने हिचकिचाते हुए साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका लिया। मैं रसोई से सरसों का तेल लेकर आया। माँ चित लेट गईं। मैंने उनकी कमर पर गर्म तेल डाला और धीरे-धीरे मलने लगा।

उनकी नरम, गर्म और मुलायम त्वचा छूते ही मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। माँ आह भर रही थीं —

“उम्म्म… बेटा… हाथ तो सोने जैसा है… बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैं धीरे-धीरे उनकी कमर से नीचे मोटी जांघों की तरफ आ गया। साड़ी और पेटीकोट को थोड़ा ऊपर किया। उनकी गोरी, मोटी जांघें चांदनी में चमक रही थीं। मेरा लंड पैंट में सख्त होने लगा।

कुछ देर बाद माँ को नींद आ गई। मैंने हिम्मत करके उनकी जांघों को और सहलाया, लेकिन उस दिन ज्यादा कुछ नहीं किया।

दूसरे दिन…

शाम होते ही माँ खुद बोलीं, “दीपक, आज फिर मालिश कर दे। कल वाली मालिश से बहुत आराम मिला था।”

मैं मुस्कुराया और बोला, “ठीक है माँ। लेकिन पहले आप दूध पी लो।”

नीचे जाकर मैंने दूध में नींद की गोली घोल दी और माँ को पिला दिया। फिर मालिश शुरू की। आज मैं जानबूझकर उनकी जांघों पर ज्यादा ध्यान दे रहा था।

“माँ, पेटीकोट थोड़ा और ऊपर कर लो, तेल लग जाएगा।”

माँ ने बिना कुछ कहे पेटीकोट को घुटनों तक उठा लिया। मैंने देखा कि उन्होंने आज अंडरवियर नहीं पहना था। उनकी मोटी, झांटों वाली चूत हल्की-हल्की झलक रही थी।

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने तेल लेकर उनकी जांघों को मलना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरे हाथ उनकी चूत के बहुत करीब पहुँचने लगे। माँ गहरी नींद में थीं।


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मैंने हिम्मत करके अपनी उंगलियों से उनकी चूत की फांक को हल्का-हल्का सहलाया। वो गर्म और थोड़ी गीली थी। माँ के मुंह से हल्की सी कराह निकली — “उम्म्म…” लेकिन वो जागी नहीं।

उस रात मैंने पहली बार हिम्मत करके अपना लंड बाहर निकाला। माँ की जांघों को थोड़ा फैलाया और अपना सख्त लंड उनकी चूत पर रख दिया। धीरे-धीरे दबाव डाला।

“आह्ह…” माँ के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली।

मैं रुका नहीं। आधा लंड अंदर चला गया। उनकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डालने लगा।

“उफ्फ… दीपक… बेटा…” माँ नींद में बड़बड़ाईं, लेकिन पूरी तरह जागी नहीं।

मैं धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। माँ की चूत मेरे लंड को अच्छे से पकड़ रही थी। कुछ मिनट बाद मैं माँ की चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया।

मैंने लंड निकालकर उनकी चूत को साफ किया और उनके बगल में लेट गया।

अगली सुबह…

माँ उठीं तो उनके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी। उन्होंने मुझे देखा और हल्के से मुस्कुरा दीं। मैं घबरा गया, लेकिन माँ ने कुछ नहीं कहा। बस चाय बनाकर दे दी और बोलीं,

“दीपक… तेरी मालिश में सच में जादू है बेटा। कल रात के बाद मेरा शरीर बिल्कुल हल्का हो गया।”

मैं बस सिर हिला दिया।

शाम होते ही माँ ने खुद बिछौना छत पर बिछाया। इस बार उन्होंने कहा,

“आज मैंने तेल भी ले लिया है। और हाँ… पहले तू मुझे दूध दे दे।”

मैंने फिर दूध में गोली मिलाकर उन्हें पिला दी। माँ ने पूरा गिलास खाली किया। फिर उन्होंने आराम से अपनी साड़ी का पल्लू उतार दिया।

“बेटा, आज गर्मी बहुत है। मैं पेटीकोट भी निकाल देती हूँ…”

कहते हुए माँ ने पेटीकोट उतार दिया। अब वो सिर्फ एक पतली पैंटी और ब्लाउज में लेटी थीं। उनकी मोटी जांघें और गोरी त्वचा चांदनी में बेहद आकर्षक लग रही थी।

मैंने तेल लेकर उनकी कमर, पीठ और जांघों की मालिश शुरू की। धीरे-धीरे मेरे हाथ उनकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर जाने लगे। माँ की सांसें भारी हो रही थीं।

“उम्म्म… दीपक… वहाँ… हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैंने हिम्मत करके उनकी पैंटी के किनारे से हाथ डाला और उनकी चूत को सहलाने लगा। माँ की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने कोई विरोध नहीं किया।

बस हल्की-हल्की कराह निकल रही थी – “आह्ह… बेटा… क्या कर रहा है तू…”

 

माँ की चूत पहले से ही गीली और गर्म हो चुकी थी। मेरी उंगलियाँ उनकी मोटी फांकों के बीच सरक रही थीं। माँ की सांसें तेज हो गई थीं।

“उम्म्म… दीपक… वहाँ मत… आह्ह…”

लेकिन उनके शब्दों में विरोध कम और चाहत ज्यादा थी। मैंने उनकी पैंटी को धीरे से नीचे सरका दिया। अब माँ की चूत पूरी तरह नंगी थी – मोटी-मोटी गोरी फांके, ऊपर हल्के झांटों का जंगल। 

मैंने तेल डाला और अपनी दो उंगलियों से उनकी चूत की अच्छी मालिश करने लगा।

माँ अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं। उनकी कमर खुद-ब-खुद ऊपर-नीचे हिलने लगी।

“आह्ह्ह… बेटा… क्या कर रहा है तू… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया। बस अपनी उंगलियाँ और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। माँ की चूत से चिकना पानी निकलने लगा था।

अचानक मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो लोहे की तरह सख्त और नसों से उभरा हुआ था। मैंने माँ की मोटी जांघों को फैलाया और अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया।

“दीपक… बेटा… ये क्या…” माँ ने आँखें खोलीं, लेकिन उनकी आँखों में नशा और उत्तेजना दोनों थे।

मैंने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड एक ही बार में अंदर चला गया।

“आआआह्ह्ह…!! दीपक… धीरे बेटा… बहुत मोटा है तेरा… उफ्फ… मेरी चूत फट जाएगी…”

मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड माँ की चूत में उतार दिया। उनकी चूत बहुत टाइट, गर्म और भीगी हुई थी। मैंने धीमी गति से चोदना शुरू कर दिया।

माँ की आँखें बंद हो गईं। उनके मुंह से लगातार कराह निकल रही थी —

“उम्म्म… हां… ऐसे ही… आह्ह… गहरी कर बेटा… उफ्फ… कितना मोटा है तेरा लंड…”

मैं गति बढ़ाता गया। अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। माँ की भारी छातियाँ ब्लाउज के अंदर उछल रही थीं। मैंने ब्लाउज के हुक खोल दिए। उनकी बड़ी-बड़ी, भारी चुचियाँ बाहर आ गईं। गहरे भूरे निप्पल सख्त हो चुके थे।

मैंने एक चुची मुंह में ले ली और जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह… बेटा… चूस… अपनी माँ की चुचियाँ चूस… हां… और जोर से…”

माँ अब पूरी तरह बेशर्म हो चुकी थीं। उनकी कमर मेरे हर धक्के के साथ ऊपर उठ रही थी।


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“फाड़ दे मेरी चूत… तेरी माँ की चूत तुझे दे रही हूँ… आह्ह… जोर से चोद बेटा…”

लगभग 10 मिनट तेज चुदाई के बाद माँ का शरीर अचानक काँपने लगा। उन्होंने अपनी कमर मेरे लंड पर जोर से दबाई और जोर से चीखीं —

“आआआह्ह्ह… निकल गया बेटा… उफ्फ… मैं झड़ गई…”

उनकी चूत से गर्म रस निकलकर मेरे लंड और जांघों पर बह गया। मैं भी कुछ ही देर बाद माँ की चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया।

मैंने लंड निकालकर उनकी चूत को अपनी अंडरवियर से पोंछा और उनके बगल में लेट गया। माँ ने मुझे कसकर जकड़ लिया। उनकी सांसें अभी भी तेज थीं।

अगली रात…

पिताजी शाम को दारू लेकर आए। इस बार उन्होंने माँ को भी पीने के लिए मजबूर किया। माँ ने एक पैग पी लिया। नशा चढ़ने लगा था।

जब माँ छत पर आईं तो वो पहले से ही झूम रही थीं। उन्होंने आते ही कहा,

“दीपक… आज तूने जो मालिश की है… वो अंदर तक कर दे… मैं जानती हूँ तू रोज मुझे चोदता है… आज मैं होश में हूँ… चोद मुझे बेटा…”

ये सुनकर मेरे शरीर में आग लग गई।

मैंने माँ को लिटाया और उनकी चूत को खूब चाटा। जीभ अंदर डालकर उनके रस को चूसता रहा।

माँ मेरे बाल पकड़कर चीख रही थीं – “आह्ह्ह… बेटा… चूत चाट… अपनी माँ की चूत चाट… जीभ अंदर डाल… हां… और तेज… उफ्फ… बहुत मजा आ रहा है…”

फिर माँ ने खुद मेरे लंड को मुंह में ले लिया। उन्होंने खूब जोर से चूसा — गला तक ले जा रही थीं।

“मम्म्म… कितना स्वादिष्ट है मेरा बेटे का लंड… चूसूँगी रोज…”

कुछ देर चूसने के बाद माँ ने कहा,

“अब डाल… अपनी माँ की चूत में डाल दे… आज मैं तेरी पूरी रंडी बनना चाहती हूँ…”

मैंने उन्हें चित लिटाया, टांगें कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। कमरे में उनकी कराहों और चुदाई की “पच्च… पच्च…” की आवाज गूंज रही थी।

“हां बेटा… फाड़ दे मेरी चूत… तेरी माँ की चूत तुझे ही दे रही हूँ… आह्ह्ह… जोर से चोद… तेज… और तेज…”

हम दोनों लगातार 20 मिनट तक चुदाई करते रहे। आखिर में मैंने माँ की चूत में ही अपना पूरा माल भर दिया।

उस रात हम तीन बार चुदाई कर चुके थे।

अब रोज का नियम बन गया…

उस रात के बाद हमारे बीच का रिश्ता पूरी तरह बदल गया। माँ मुझे देखते ही शरमाती मुस्कान देतीं। दिन भर घर के काम करतीं, लेकिन शाम होते ही उनकी आँखों में अलग चमक आ जाती।

अब हमारा रोज का कार्यक्रम तय हो चुका था। पिताजी सो जाते, माँ उन्हें दो गोलियाँ पिला देतीं। फिर छत पर हम दोनों का खेल शुरू होता।

एक हफ्ते बाद माँ अब पूरी तरह खुल चुकी थीं। उस शाम उन्होंने मुझे कहा,

“दीपक, आज मैं कुछ खास करके आई हूँ।”

माँ ने एक छोटी सी शीशी निकाली — सुगंधित तेल था उसमें। उन्होंने अपनी साड़ी पूरी उतार दी और सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में लेट गईं।

“आज तेरी माँ को अच्छे से तैयार किया है। चूत साफ कर ली है… देखना पसंद आएगा।”

मैंने तेल लेकर उनकी मालिश शुरू की। इस बार मैंने पहले उनकी भारी छातियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलना शुरू किया। माँ आह भर रही थीं —

“उम्म्म… बेटा… जोर से मसल… तेरी माँ की चुचियाँ तुझे बहुत पसंद हैं ना?”

मैंने ब्लाउज खोल दिया। उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने निप्पल मुंह में लेकर जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह… हां बेटा… चूस अपनी माँ की चुचियाँ… काट ले…”

धीरे-धीरे मैं नीचे आया। उनका पेटीकोट उठाकर मैं उनकी चूत पर झुक गया। आज उन्होंने चूत को बिल्कुल साफ कर रखा था — गुलाबी और चमकदार। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया।

माँ पागल हो गईं। उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया —

“आआह्ह्ह… चाट बेटा… अपनी माँ की चूत चाट… जीभ अंदर डाल… हां… ऐसे ही… उफ्फ… मैं फिर झड़ जाऊँगी…”

माँ दो बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत पूरी तरह गीली और चमक रही थी।

 

माँ अब पूरी तरह पागल हो चुकी थीं। मैंने अपना लंड निकाला और उनके मुंह के पास ले गया। माँ ने बिना एक पल सोचे मुंह खोल दिया और पूरा लंड अंदर ले लिया।


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“ग्लक… ग्लक… मम्म्म…” वे गला तक ले जा रही थीं। उनकी आँखों में पानी आ गया था, लेकिन वो रुकी नहीं।

“कितना स्वादिष्ट है मेरा बेटे का लंड… रोज चूसूँगी…”

कुछ देर खूब चूसने के बाद माँ ने घुटनों के बल होकर गांड ऊपर कर दी — डॉगी स्टाइल। उनकी मोटी, गोरी गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा।

“आआआह्ह्ह…!!! फाड़ दी मेरी चूत… हां बेटा… जोर से चोद… अपनी माँ को चोद…”

मैंने उनकी कमर पकड़ ली और तेज-तेज धक्के मारने लगा। “थप-थप-थप” की आवाज छत पर गूंज रही थी। माँ की भारी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।

मैंने उनके बाल पकड़े और घोड़े की तरह चोदने लगा।

“ले माँ… ले अपनी चूत में बेटे का मोटा लंड… कितनी टाइट चूत है तेरी… उफ्फ…”

“हां बेटा… फाड़ दे… जितना मन करे चोद… मैं तेरी रंडी हूँ… आह्ह्ह… तेज… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो…”

15 मिनट जोरदार चुदाई के बाद मैंने माँ को फिर चित करके चोदा। उनकी टांगें मेरी कमर पर लिपटी थीं। आखिर में मैंने उनकी चूत के अंदर ही गर्म वीर्य उड़ेल दिया।

माँ ने मुझे कसकर जकड़ लिया और बोलीं,

“दीपक… मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था। तू अब मेरा पति बन गया है।”

अब रोज का मजा…

उसके बाद हम दोनों बिल्कुल खुल गए। कभी-कभी पिताजी सोने से पहले ही हम मालिश का बहाना करके शुरू कर देते। माँ अब खुद मुझसे कहतीं,

“बेटा आज मेरी गांड भी मालिश कर देना…”

हमने कई पोजीशन ट्राई किए – कभी स्टैंडिंग सेक्स, कभी माँ ऊपर चढ़कर सवार, कभी बालकनी में खड़े-खड़े।

एक रात माँ ने मुझे चौंकाया। उन्होंने कहा,

“दीपक, अब मैं गर्भनिरोधक गोलियाँ खा रही हूँ। अब तू बिना डरे अपनी माँ की चूत में रोज माल भर सकता है।”

ये सुनकर मैं और भी दीवाना हो गया।

अब हम बिना किसी डर के खुलकर चुदाई का आनंद लेते। माँ कभी-कभी बहुत डर्टी बातें करतीं – “बेटा, तेरी माँ की चूत तेरे लंड के लिए बनी है… रोज भर दे इसमें…”

कभी वो मुझे चूत चटवातीं, कभी लंड चूसतीं, कभी अपनी गांड भी चुदवातीं।

दोस्तों, ये थी मेरी और मेरी माँ राधा की चुदाई की असली कहानी। जिस चूत ने मुझे जन्म दिया, उसी चूत को चोदने में जो मजा आया, वो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।

अब घर में पिताजी शराब पीकर सोते हैं और माँ-बेटे रात भर एक-दूसरे की प्यास बुझाते हैं।

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श्रेणी: 📁 माँ बेटा
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