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स्कूटी सिखाने के बहाने रूबी दीदी की बीच सड़क पर चुदाई 02

📅 November 2, 2026 👤 Vasnastory 🔥 NEW

भाग: 1 2 2

Family Sex Stories : अब कहानी के इस भाग में जाने की कैसे मुझे दीदी की Antarvasna जगाने का फल उन्हे जंगल में खुली सड़क में कुतिया बनाकर चोदने से मिला!

अभी तक आपने “स्कूटी सिखाने के बहाने रूबी दीदी की बीच सड़क पर चुदाई!” में पढ़ा :-

“हमें स्कूटी पर घूमते हुए दो दिन हो गए थे, और अब मुझे वो स्पर्श अच्छा लगने लगा था। मेरी रातें बेचैन हो रही थी। मैं हाशमी के बारे में सोचती और अपनी चूत पर हाथ फेरती। वो कहने को मेरा भाई था, लेकिन मेरा इरादा साफ था वो भी चुदाई का। 

फिर तीसरे दिन मैं तैयार हुई। अब मैने लाल सलवार-कमीज ली लेकिन अंदर कुछ नहीं पहना। “भैया, आज कहाँ चलें?” मैंने पूछा तो वो बोला, “दीदी, आज एक सुनसान सड़क पर चलते है वहां आसानी से सिखलोगी सब। वो मुझे गाँव के बाहर, जंगल वाली सड़क पर ले आया। “

अब आगे :-

वो बोला “वहाँ प्रैक्टिस अच्छी होगी।” लेकिन मैं जान गई उसका इरादा जो था फिर खेल शुरू हो गया। हमने स्कूटी स्टार्ट की, लेकिन आज मैं आगे नहीं बैठी। “भैया, तुम चलाओ, मैं पीछे बैठती हूं।” वो मुस्कुराया।

वो रास्ता लंबा था। हमारा गाँव पीछे छूटा, फिर कुछ खेत आए और फिर सुनसान जंगल आ गया। वो सुनसान सड़क थी, न कोई गाड़ी, न इंसान दिख रहा था। सिर्फ पक्षियों की चहचहाहट मुझे सुनाई दे रही थी।


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हाशमी ने स्कूटी धीमी की। “दीदी, अब तुम चलाओ।” वो उतरते हुए बोला, मैं भी आगे आ गई। उसके हाथ मेरी कमर पर थे। लेकिन जैसे ही स्कूटी चली, उसके होंठ मेरे कंधे पर आए। उसका चुम्बन मुझे मिलने लगा, वो एक के बाद एक मेरे कंधे पर अपनी गर्म किस देता रहा। 

वो बोला “दीदी, तुम्हारा बदन कितना मदक है बिल्कुल आग लगाने वाला।” मैं भी हमममम! की सिसकारी भर ली। स्कूटी धीमी चल रही थी, और उसके हाथ चुंचियों पर धीरे धीरे बढ़ रहे थे । ये Bhai Bahan Ki Chudai Ki Kahani आप Vasnastory पर पढ़ रहे है।

वो मेरी जवानी दबा दबा कर, मसल रहा था। मेरे निप्पल्स को उँगलियों से नचोड़ा जा रहा था। “आह भैया… ये क्यों कर रहे हो, उफ्फफ!” मैं बहकी लेकिन लेकिन रोकने की कोशिश नहीं कर सकी।

अचानक, वो बोला, “दीदी, रुको। यहाँ एक परफेक्ट जगह है।” हमने स्कूटी साइड में खड़ी की। वो सुनसान सड़क थी जहां चारों तरफ पेड़ थे। अभी लेकिन हम उतरे नहीं। हाशमी ने कहा, “स्कूटी पर ही रहो।” और उसके हाथ मेरी कमर में घुस गए। 

उसने मेरी सलवार नीचे सरका दी। मेरी चूत नंगी और गीली थी। मेरे सांवले रंग की पसीने की चमकती बूंदे स्कूटी के शीशे में दिख रही थी। फिर उसकी उँगलियाँ चूत के करीब पहुँचीं। “दीदी, कितनी गर्म हो तुम।” वो फुसफुसाया। अब मेरा खुदपर काबू न रहा मैंने पीछे मुड़कर उसके होंठ चूम लिए। 

वो पहला चुम्बन भाई-बहन का नहीं, प्रेमी प्रेमिका वाला था । वो थोड़े होठ खोले तो मेरी ज़बान मुझे बिना बताए उसके मुंह में चली गई और हमारी जीभें लड़ीं, हमार्ज लार मिली। हाशमी ने फिर अपनी पैंट खोली और उसका लंड बाहर आया । वो काला नाग! 7 इंच लंबा व मोटा था और उसका सिरा बिल्कुल लाल। 

धीर से मैंने पीछे हाथ बढ़ाया और उसके मोटे लंड को पकड़ा। वो गर्म था और कड़ा हो रहा था। उसे छु कर मैं जैसे सहम गई “भैया… इतना बड़ा है तुम्हारा?” मेरी बात पर वो हँसा और बोला, “दीदी, तुम्हारे लिए ही है।” 

स्कूटी पर ही, मैं आगे झुकी स्कूटी का हैंडल पकड़कर वो पीछे से आया। उसने पहले उँगलियाँ मेरी नाज़ुक चूत में डालीं पहले एक आआह ! दो आह आआह!, फिर तीन ओंह्ह्ह! वो धीरे धीरे अंदर-बाहर उंगलियों को घुमाने लगा।

“आह्ह… उह्ह आआह! ओह भाई धीरे आआह!” मेरी सिसकारियाँ खुले आसमान के नीचे गूँज रही थीं। जंगल में सिर्फ मैं ओर हाशमी थे । फिर हाशमी ने उसका लंड का सिरा मेरी चूत पर रगड़ा। 

मैं उत्तेजना से बोल उठी “डालो भैया! ज्ञान्हन्ह! चोदो मुझे।” मैं बोली। उसने पहले एक धक्का मारा और आधा लंड अंदर ठुक गया। अआआह! मुझे दर्द और सुख का एहसास एक बार में मिला। 


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उसने एक धक्का दुबारा लगाया और फिर पूरा नाग मेरी चूत में समा गया । “आह्ह्ह! आगाह भाई” हमारी स्कूटी हिलने लगी। वो मेरी चूत में धक्के मार रहा था। मेरी चुंचियाँ उछल रही थीं, वो टी-शर्ट से बाहर आने को बेताब मेरी आहे आआह! चोदो अआआह हाआअ! और तेज़ अआआह, अच्छा लग रहा है आह ओंह्ह्ह चोद ज़ोर से उन्नन्ह।

“दीदी, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है।” वो बोल रहा था, उसकी सेक्सी बातो का मैं जवाब दे रही, “भैया, और जोर से अआआह! अपनी दीदी को चोदो बना ले मुझे अपना।” स्कूटी पर बैठे-बैठे चुदाई का आनंद ही अलग आ रहा था।

मैने पैर फैलाए, हैंडल कस कर पकड़े हुए मैने अपना जिस्म संभाला । मेरी चुदाई हवा में चल रही थी, पेड़ों की सरसराहट चुदाई की आवाजों से मिलकर सुर बना रही थी। फिर अचानक, गहरे बादल छाए। और बारिश की बूँदें गिरने लगी। 

पानी मेरे चुदाई से दहकते बदन पर गिरा, और मेरी गर्मी से चमकाने लगा। हाशमी के धक्कों के साथ पानी की चपचाप की आवाज़ होने लगी ” ये बारिश, आह भैया, कितना रोमांच भरा पल है देखना!” मैं चिल्लाई। बारिश ने मेरी चूत की गर्मी बढ़ा दी थी। 

चूत और गीली होकर, लंड चिकना करने लगी। हमारे धक्के तेज हो गए मेरी आगाह! ओह चोद हाआअ अआआह की आवाज़ से मेरी हालत मौसम को भी पता चल रही थी। पानी हमारे जोड़ों पर गिर रहा था।  ये Desi Sex वाली Antarvasna Family Hindi Sex Story आप Vasnastory पर पढ़ रहे है।

वो माहौल जादुई सा होता जा रहा था – सुनसान सड़क, बारिश की बूँदें, और हमारी सिसकारियाँ उफ्फफ! हाशमी ने मेरी टी-शर्ट ऊपर की, और चुंचियाँ नंगी हो गई। बारिश में भीगीं मेरी काली चूंची पर, सख्त निप्पल्स को हाशमी पीने लगा।  

वो पीछे से ही मुझे मसलने लगा। “दीदी, तुम्हारी चुंचियाँ… बारिश में और सुंदर लग रही है।” मैं आगाह! अआआह! करते हुए पीछे मुड़ी, मैने उसके कंधे पर चूमा।

हमारी चुदाई जारी थी – 10 मिनट, फिर 15… फिर आधा घंटा इस हसीन चुदाई में गुज़र गया। फिर बारिश तेज होने लगी, लेकिन हम रुके नहीं। पानी नदी बनकर बह रहा था हमारे बदनों पर बूंदे गर्मी बड़ा रही थी। 

मेरी सिसकारियाँ ऊँची उठने लगी – “आह्ह… उह्ह… भैया, मैं आ रही हूँ अआआह! मुझे संभालो!” वो बोला, “दीदी, मैं भी आने वाला हूं तुम्हारे अंदर ही!” फिर कुछ आखिरी धक्के लगे, और गरम वीर्य – मेरी चूत में घुसता चला गया । 


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हम दोनों हाँफे जा रहे थे, स्कूटी पर लिपटे हुए हमने एक दूसरे के खूब होठ चूसे मेरी नंगी चूत अभी भी उसके लंड पर थी और मैं उसकी गोद में। हमारे चुदाई के रस को बारिश धुला रही थी, लेकिन हमारा नशा बाकी था या कहूं की अभी तो शुरुआत हुई थी।

फिर हम स्कूटी से उतरे। बारिश में नंगे खड़े होकर एक-दूसरे को बाहों में लेकर चूमा। हाशमी ने मेरी कमर पकड़ी, चुंचियाँ चूसीं। मैंने भी उसका लंड फिर प्यार से चूसा – पहली बारिश के पानी के साथ उसका रस बहुत अच्छा लग रहा था। 

लेकिन जल्दी ही हमने कपड़े पहने और स्कूटी स्टार्ट की। घर लौटे तो रात हो चुकी थी। हमारे गीले कपड़े देख मेरी सास ने मुझे थोड़ा डाटा, लेकिन मेरे चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान थी। उसके बाद, हर शाम स्कूटी का बहाना बनाकर चुदाई का मज़ा लेते थे। 

कभी मैदान में, कभी जंगल में कभी खुली सड़क पर। बारिश का वो दिन मुझे आज भी याद है – रोमांच, गर्मी, और दर्द भरा सुख। कहने को तो हाशमी मेरा भाई था, लेकिन अब प्रेमी भी बन गया था । गाँव की वो सड़कें गवाह हैं हमारी इस अंजान प्रेम कहानी की।

तो कैसी लगी आपको ये कहानी hashmilion5@gmail.com पर मेल कर के ज़रूर बताएं और किसी को स्कूटी सीखनी हो तो आपका हाशमी लायन हाज़िर रहेगा आपकी सेवा में।

श्रेणी: 📁 भाई बहन
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