फौजी किराएदार ने छेड़ी निशा की कुँवारी चुत! 02
Antarvasna Sex : मम्मी-पापा के न होने पर फौजी ने फाड़ी निशा की कुँवारी चूत! सील टूटने पर निकली खून! रात भर Wild Sex कर 4 बार अंदर भरा माल! और खोल दी पूरी चूत!
अभी तक आपने “फौजी किराएदार ने छेड़ी निशा की कुँवारी चुत!” में पढ़ा :-
वो फिर मेरी चूत चाटने लगा और मैं उसके लंड को मुँह में लेकर सुपारे को जीभ से कुरेदने लगी। मेरी कराहें फिर से शुरू हो गईं,
“आआह… उह्ह्ह… और… आआह…”
तभी मेरा फोन बजा। मम्मी का फोन था। मैंने जल्दी से कपड़े पहने और बाहर निकल गई। बाल्टी उठाकर नीचे चली गई। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। चूत गीली थी और मुँह में वीर्य का स्वाद बाकी था।
अब हम दोनों कोई मौका नहीं छोड़ते थे। जब भी मौका मिलता, छत पर या उसके कमरे में चले जाते। वो मेरी चूत चाटता, मैं उसका लंड चूसती। हम दोनों एक-दूसरे का पानी चखते।
लेकिन अभी तक मेरी सील नहीं टूटी थी। हर बार मंजिल के करीब पहुँचकर रुक जाते। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ता, सुपारा अंदर तक जाता लेकिन पूरी तरह नहीं घुसता। मैं डरती थी और वो भी जबरदस्ती नहीं करता।
लेकिन दोनों के अंदर की आग बढ़ती जा रही थी।
हर बार हम दोनों ने एक दूसरे का पानी बहुत स्वादिष्ट तरह से निकाला और चखा! लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंच पाए हर बार मंजिल तक पहुंच कर रह जातें!
लेकिन जिस तरह से हम दोनों ही एक दूसरे के नजदीक आ गए तो जल्दी ही मेरी सील पैक चुत में फौजी किराएदार का लन्ड मेरी चुत में जड़ तक जाकर मेरी चुत में खून खराबा करते हुए मेरी सील तोड़ कर मेरी चुत का उद्घाटन जरुर करेगा!
आगे जानिए कैसे फौजी ने मेरी सील पैक चुत को तहस-नहस करके मेरी चुत की सील तोडी!
🔥 एक और कामुक स्टोरी : फौजी किराएदार ने छेड़ी निशा की कुँवारी चुत!
मम्मी-पापा नाना के घर एक हफ्ते के लिए चले गए थे। घर की देखभाल के लिए मैं अकेली थी। फौजी को अब पूरा खुला रास्ता मिल गया। शाम को मैंने खाना जल्दी निपटाया, नहाकर नाइटी पहनकर बैडरूम में आ गई।
थोड़ी देर बाद दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। मैंने खोला तो फौजी खड़ा था। हाथ में शराब की बोतल थी, आँखें थोड़ी लाल, साँस में महक आ रही थी।
मैंने उसे अंदर आने दिया। तुरंत सारी लाइटें बंद कर दीं। सिर्फ बैडरूम में एक छोटा लाल बल्ब जला दिया। कमरे में हल्की लाल रोशनी फैल गई। फौजी मेरे पास आया और बोला,
“निशा, तुम बहुत अच्छी लगती हो, सेक्सी हो।” उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे मुँह से मुँह लगाकर होंठ चूमने लगा। लंबा, गहरा, गीला चुंबन। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई।
मैंने कहा, “धीरे-धीरे…” लेकिन वो अपने होशोहवास खो चुका था। उसने मेरी नाइटी ऊपर खींचकर उतार दी। मैं पूरी नंगी हो गई। ठंडी हवा मेरे शरीर पर लगी।
उसने अपनी लुंगी भी उतारकर फेंक दी। उसका काला, मोटा, लंबा लंड पूरी तरह खड़ा था, नसें उभर रही थीं। मुझे बाहों में भरकर बेड पर लिटा दिया। कभी मैं उसके ऊपर चढ़ जाती, कभी वो मेरे ऊपर।
हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे। उसके हाथ मेरे बूब्स पर घूम रहे थे।
काफी देर किस करने के बाद वो मेरे चुचियों को मसलने लगा। दोनों हाथों से दबा-दबाकर निप्पल्स को उँगलियों के बीच ले रहा था। फिर एक चुची को मुँह में लेकर चूसने लगा। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं,
“आआह… सस्स… ह्ह्ह… मम्म… उह्ह्ह…” मैंने कहा, “धीरे-धीरे… काटो मत… आआह…” वो बारी-बारी से दोनों चूचियों को दबा-दबाकर चूस रहा था। निप्पल्स मोटे-मोटे होकर तन गए थे।
वो उन्हें मुँह में लेकर जोर से चूस रहा था, जीभ से चाट रहा था। मेरी जोर-जोर की सिसकियाँ निकल रही थीं। फिर उसने मेरे मुँह को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
उसके मुँह से शराब की दुर्गंध आ रही थी। मुझे भी शराब का हल्का असर होने लगा। मेरे शरीर में लावा सा भर गया। गर्मी बढ़ती जा रही थी। उसका काला, मोटा, लंबा लंड मेरी गाँड और चूत के आसपास जाँघों पर हलचल मचा रहा था, ठोकरें मार रहा था।
फौजी अपनी जीभ से मेरे शरीर को चाट-चूम रहा था। गर्दन, कंधे, पेट, सब जगह गीला कर रहा था। मैं भी होश खो चुकी थी।
“आआह… मम्म… ऊऊ… ईई… उह्ह्ह…” मेरे मुँह से निकल रहा था।
तभी फौजी नीचे सरक गया और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया। चाटना शुरू किया।
मेरी लंबी हिचकी निकल गई, “उईई… ह्ह्ह… आआह… उह्ह्ह…” मैंने उसके मुँह को अपने हाथों से जोर से पकड़कर अपनी चूत से भिड़ा दिया। अपनी चूत और गाँड को ऊपर उछालने लगी।
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“खख… ईई… आआह… ह्ह्ह… इइ… उह्ह्ह…” वो जोर-जोर से चाट रहा था। उसकी जीभ अंदर तक घुस रही थी, चूत के पानी को चाट रहा था। मेरी चूत से ढेर सारा पानी झड़कर उसके मुँह पर निकल गया। उसने सारा पानी पी लिया और चूत को और चूसता रहा।
मैं काँप रही थी, “आइइ… ह्ह्ह… आआह…”
फौजी मेरे ऊपर आ गया। मेरी दोनों टाँगों को चौड़ा किया और अपना लंड हाथ में लेकर चूत पर रगड़ने लगा। सुपारे को चूत के मुँह पर लगाया और धक्का दिया। मेरी हिचकी निकल गई। लंड चूत से ठोकर खाकर फिसल गया।
फौजी का लंड देख मेरे शरीर में सिरहन दौड़ गई। मैं अपने को तैयार कर रही थी, साँसें तेज थीं। तभी फौजी ने फिर से लंड चूत में लगाया और तगड़ा धक्का दिया।
इस बार लंड मेरी चूत को चीरते हुए अंदर घुस गया। मेरी आँखों से आँसू निकल आए।
लंबी चीख निकल गई, “उईई… मम्मी… मर गई… आआह…” फौजी ने तुरंत अपने मुँह से मेरा मुँह बंद कर दिया और दूसरा धक्का मारा। लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ और अंदर घुस गया।
उसने लगातार धक्के लगाए और पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक घुसा दिया। मेरी चूत से खून निकलने लगा। लंड मेरी बच्चेदानी तक पहुँच गया था। दर्द बहुत तेज था।
मैं दर्द से कराह उठी। हालत खस्ता हो गई थी। फौजी ने मुझे जकड़कर दबा रखा था।
मैंने कहा, “निकाल लो… छोड़ दो मुझे… बहुत दर्द हो रहा है…” फौजी बोला, “निशा, बस थोड़ी देर तक दर्द सहन कर लो, फिर अच्छा लगेगा।”
मैंने फिर कहा, “मेरी जान निकल रही है… छोड़ दो मुझे…” लेकिन फौजी ने कोई जवाब दिए बिना ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए।
लंड तेजी से चूत को तहस-नहस करते हुए अंदर-बाहर हो रहा था। “आख… मम्म… मर गई… मम्मी… ऊई… आआह… ह्ह्ह… मम्म… उह्ह्ह…” मैं अपने सिर को इधर-उधर पटकने लगी।
“आआह… मम्म… रर… बबड… गगड… मम्मी… माँ…” फौजी रुक नहीं रहा था। कमरे में फच-फच, फट-फट की आवाजें गूँज रही थीं। बैडरूम में जोरदार आवाज फैल रही थी। लंड की नसें मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ खा रही थीं।
तभी मेरी चूत से पानी निकल गया। दर्द के साथ-साथ अच्छा भी लगने लगा। मैंने अपनी दोनों बाहों का हार फौजी के गले में डालकर जोर से भींच लिया। अब मैं अपनी गाँड उठाकर लंड लेने लगी।
“आआह… ह्ह्ह… उह्ह्ह…” फौजी ने मेरी दोनों टाँगों को उठाकर अपने कंधों पर रख दिया और जोर-जोर से लंड गहराई में मेरी चूत में धक्के लगाने लगा।
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“आआह… मम्म… ठठ… उह्ह्ह…” मैं भी अपने चूतड़ों को ऊपर उठा रही थी। लंड मेरी बच्चेदानी में जा रहा था। मैं फिर से झड़ गई। लेकिन फौजी धक्के लगाने में लगा रहा।
मैं अपनी जीभ और उँगली से फौजी के चुचियों के निप्पल को चूसने और मसलने लगी। लगभग पंद्रह मिनट और ताबड़तोड़ धक्के से मेरी चुदाई करते हुए मैं तीन बार फिर झड़ गई।
साथ ही फौजी ने जड़ तक लंड फँसाकर ढेर सारा गर्म वीर्य मेरी चूत में लबालब भर दिया।
“आआह… ह्ह्ह… गड़… उह्ह्ह…” मैं काँप रही थी। वीर्य की धार अंदर तक जा रही थी।
काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। साँसें धीमी हो रही थीं। फिर फौजी ने लंड धीरे से खींचकर निकाला। मेरी चूत से ढेर सारा वीर्य खून से मिला-जुला निकलकर बेडशीट पर गिरने लगा। मेरी चूत सूज गई थी, दर्द हो रहा था।
मैं पेशाब के लिए उठी तो दर्द से कराह उठी और उठ नहीं पाई। फौजी ने सहारा दिया और मुझे गोद में लेकर बाथरूम ले गया। वहाँ से वापस लाकर बैड पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
फौजी ने पूरी रात मेरी चार बार जमकर चुदाई की। हर बार अंदर वीर्य छोड़ा। मेरी चूत पूरी तरह खुल गई थी। सुबह तक हम दोनों थककर सो गए।
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